38 वे सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेले में पश्चिम बंगाल के जिला पूर्बा बर्धमान के गांव ब्रह्मांडीही निवासी अंजुमनारा बेगम महिला सशक्तिकरण की मिसाल बनकर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के स्वप्न को साकार कर रही हैं। वर्ष 2002 में करीब 17 साल की उम्र में पटना में आयोजित हुई हस्तशिल्प प्रदर्शनी में बुनकारी की कारीगरी से मिले सम्मान से अंजुमनारा को प्रोत्साहन मिला और फिर अपनी माता की राह पर चलते हुए उसने खादी कपड़ों के कारोबार को ही अपना व्यवसाय बना लिया। उनके बनाए हुए कपड़े केवल भारत में ही नहीं, अमेरिका, इंग्लैंड, फ्रांस, ईरान, ईराक आदि देशों में भी निर्यात किए जा रहे हैं। सूरजकुंड मेले में अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलने पर वह गौरवान्वित महसूस कर रही है। अपने गांव में अंजुमनारा बेगम ने 10 महिलाओं को साथ जोडक़र महिलाओं के कपड़े, बेडशीट, वॉल हैंगिंग, कुर्ती, जाकेट, कपड़े से बने सजावट समान बेचने का काम शुरू किया था।