हरियाणा फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) ने वर्ष 2026 की पहली तिमाही में लंबित मामलों के निपटान में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए अपनी कार्यकुशलता का मजबूत उदाहरण पेश किया है। वैज्ञानिक जांच प्रणाली को सुदृढ़ बनाते हुए एफएसएल ने न केवल मामलों के बैकलॉग को कम किया है, बल्कि जांच प्रक्रिया को भी तेज, पारदर्शी और अधिक प्रभावी बनाया है। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, 1 जनवरी 2026 को जहां लंबित मामलों की संख्या 16,040 थी, वहीं 31 मार्च 2026 तक यह घटकर 14,863 रह गई। यह लगभग 8 प्रतिशत की कमी दर्शाता है, जो एफएसएल की सुनियोजित कार्यप्रणाली, बेहतर समन्वय और निरंतर प्रयासों का परिणाम है। इतने बड़े स्तर पर बैकलॉग में कमी आना राज्य की फॉरेंसिक व्यवस्था में सुधार का स्पष्ट संकेत है और यह दर्शाता है कि संस्थान ने समयबद्ध निपटान को प्राथमिकता दी है।