चंडीगढ़, 16 अप्रैल।* हरियाणा फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) ने वर्ष 2026 की पहली तिमाही में लंबित मामलों के निपटान में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए अपनी कार्यकुशलता का मजबूत उदाहरण पेश किया है। वैज्ञानिक जांच प्रणाली को सुदृढ़ बनाते हुए एफएसएल ने न केवल मामलों के बैकलॉग को कम किया है, बल्कि जांच प्रक्रिया को भी तेज, पारदर्शी और अधिक प्रभावी बनाया है। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, 1 जनवरी 2026 को जहां लंबित मामलों की संख्या 16,040 थी, वहीं 31 मार्च 2026 तक यह घटकर 14,863 रह गई। यह लगभग 8 प्रतिशत की कमी दर्शाता है, जो एफएसएल की सुनियोजित कार्यप्रणाली, बेहतर समन्वय और निरंतर प्रयासों का परिणाम है। इतने बड़े स्तर पर बैकलॉग में कमी आना राज्य की फॉरेंसिक व्यवस्था में सुधार का स्पष्ट संकेत है और यह दर्शाता है कि संस्थान ने समयबद्ध निपटान को प्राथमिकता दी है।
हरियाणा एफएसएल को मिली बड़ी कामयाबीः पहली तिमाही में लंबित मामलों में 8 प्रतिशत की कमी, 15 दिन में बडे़ मामलों की रिपोर्ट
वैज्ञानिक जांच बनेगी न्याय की मजबूत नींवः अजय सिंघल, पुलिस महानिदेशक हरियाणा’
इस अवसर पर हरियाणा के पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने कहा कि हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के कुशल नेतृत्व में फॉरेंसिक विज्ञान आज की आधुनिक और प्रभावी पुलिसिंग की आधारशिला बन चुका है। हरियाणा पुलिस वैज्ञानिक साक्ष्यों पर आधारित जांच को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए नई तकनीकों और आधुनिक उपकरणों का व्यापक उपयोग कर रही है। एफएसएल की क्षमता में यह वृद्धि जांच प्रक्रिया को अधिक तेज, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाएगी, जिससे हर केस में ठोस और सटीक साक्ष्य न्यायालय के सामने पेश कर पाएंगे। उन्होंने कहा कि समयबद्ध फॉरेंसिक रिपोर्ट, विशेषकर जघन्य मामलों में, पुलिस जांच को निर्णायक बढ़त देती है और न्यायालयों में मजबूत केस प्रस्तुत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि हरियाणा में जांच प्रणाली पूरी तरह वैज्ञानिक और साक्ष्य-आधारित हो, ताकि दोषियों को सजा दिलाने की प्रक्रिया और अधिक प्रभावी हो तथा आमजन का न्याय प्रणाली पर विश्वास और मजबूत हो।
हरियाणा एफएसएल का ऐतिहासिक प्रदर्शनः तकनीकी सशक्तिकरण और तेज़ जांच से अपराध नियंत्रण को मिली नई रफ़्तार
अत्याधुनिक तकनीक और मोबाइल फॉरेंसिक वैन से जांच में आई क्रांतिकारी तेजी, साक्ष्य आधारित कार्रवाई हुई और मजबूत
हरियाणा फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) ने वर्ष 2026 की पहली तिमाही (जनवरी- मार्च) में अभूतपूर्व उपलब्धियां हासिल करते हुए राज्य की अपराध जांच प्रणाली को और अधिक सशक्त एवं प्रभावी बनाया है। अत्याधुनिक तकनीकों के समावेश, मानव संसाधन में विस्तार और मामलों के त्वरित निपटान के माध्यम से एफएसएल ने यह साबित कर दिया है कि वैज्ञानिक जांच ही आधुनिक पुलिसिंग की रीढ़ है। एफएसएल में इस अवधि के दौरान मानव संसाधन को सुदृढ़ करने पर विशेष बल दिया गया। 63 नए पदों की स्वीकृति से संस्थान की कार्यक्षमता में और सुधार की उम्मीद है। इनमें वैज्ञानिक अधिकारियों और तकनीकी स्टाफ की अहम भूमिका होगी, जो जटिल मामलों की जांच को और अधिक सटीक एवं विश्वसनीय बनाएंगे। भर्ती प्रक्रिया को भी प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जा रहा है, ताकि जल्द से जल्द इन पदों को भरा जा सके और प्रयोगशाला की क्षमता को पूर्ण रूप से उपयोग में लाया जा सके।
तकनीकी उन्नयन के क्षेत्र में एफएसएल ने महत्वपूर्ण निवेश करते हुए लगभग 3.28 करोड़ रुपये के अत्याधुनिक उपकरण खरीदे हैं। इन उपकरणों के माध्यम से डीएनए विश्लेषण, नारकोटिक्स जांच, साइबर फॉरेंसिक और डिजिटल साक्ष्य विश्लेषण जैसे क्षेत्रों में अभूतपूर्व गति और सटीकता हासिल की जा रही है। इसके अतिरिक्त, 68.7 लाख रुपये की लागत से विशेष रूप से साइबर और डिजिटल अपराधों की जांच के लिए उपकरणों को शामिल किया गया है, जिससे नई प्रकार की अपराध चुनौतियों से निपटना और अधिक प्रभावी हो गया है। इसके साथ ही, राज्य सरकार द्वारा 11 अत्याधुनिक मोबाइल फॉरेंसिक वैन की स्वीकृति दी गई है, जो घटनास्थल पर ही साक्ष्य संग्रह और प्रारंभिक विश्लेषण की सुविधा प्रदान करेंगी। यह पहल न केवल जांच की गुणवत्ता को बढ़ाएगी बल्कि साक्ष्यों के संरक्षण और समयबद्ध विश्लेषण को भी सुनिश्चित करेगी, जिससे अपराधियों के खिलाफ मजबूत केस तैयार करने में सहायता मिलेगी। हरियाणा एफएसएल द्वारा किए गए ये प्रयास राज्य की कानून-व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहे हैं। वैज्ञानिक साक्ष्यों पर आधारित जांच से न केवल अपराधियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई संभव हो रही है, बल्कि न्यायालयों में दोषसिद्धि दर बढ़ाने में भी मदद मिल रही है।