पंजाब में इन-सीटू फसल अवशेष प्रबंधन (सीआरएम) मशीनों का उपयोग करने वाले लगभग आधे किसान मशीनों के कुशल संचालन और कीट नियंत्रण के लिए धान के कुछ खुले डंठलों को जलाते हैं। यह जानकारी आज जारी की गई काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू) की एक नई रिपोर्ट से सामने आई है। इसके अनुसार, सर्वेक्षण में शामिल 58 प्रतिशत किसानों ने पराली प्रबंधन के लिए सुपर सीडर और रोटावेटर जैसी मशीनों का उपयोग किया। हालांकि, किसानों की सीआरएम मशीनों तक समय पर पहुंच, मशीनों के इस्तेमाल के लिए उचित प्रशिक्षण की कमी और मशीनों के इस्तेमाल से गेहूं का उत्पादन घटने व कीटों के हमले होने की गलत धारणा जैसे कारणों से अभी भी पराली को जलाने से रोकने के सामने चुनौतियां मौजूद हैं।