निखिल सहराय , गुरुग्राम। पुलिस आयुक्त कार्यालय में गुरुवार को जिला आपदा प्रबंधन कमेटी की बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक की अध्यक्षता पुलिस आयुक्त विकास अरोड़ा ने की। इस दौरान उपायुक्त अजय कुमार सहित अन्य उच्च अधिकारी बैठक में उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान जिला स्तर पर आपदाओं से निपटने के लिए मौजूद तैयारियों का जायजा लिया गया और आवश्यक उपायों पर विस्तृत चर्चा की गई। पुलिस आयुक्त विकास अरोड़ा व उपायुक्त अजय कुमार ने कहा कि आपदा प्राकृतिक व कृत्रिम किसी भी प्रकार की हो सकती है। इसमें भूकंप, बाढ़ के अलावा बम ब्लास्ट, रसायन रिसाव व आतंकवादी हमला जैसी कोई भी अप्रिय घटना शामिल है। ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए जिला स्तर पर तैयारी जरूरी है। आपदा नियंत्रण में समयबद्ध तरीके से निदान अति आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी की जानकारी पहले से ही होनी चाहिए।
जिला आपदा प्रबंधन कमेटी की बैठक में आपदा प्रबंधन के उपायों पर की गई चर्चा
इससे टीम बनाकर काम करने में सहयोग मिलता है। उपायुक्त अजय कुमार ने बताया कि जिले में इमरजेंसी रिस्पॉस व्हीकल भी तैयार किया जाएगा। इसमें आपदा के समय इस्तेमाल होने वाली सभी जरूरत के उपकरण उपलब्ध होंगे। जिला प्रशासन की ओर से इंसिडेंट रिस्पांस सिस्टम (आइआरएस) तैयार किया जा रहा है। इससे आपदा के समय किसी भी अप्रिय घटना में अधिकारी रिस्पांस सिस्टम के अनुसार कार्य कर सकेंगे। डीसीपी ट्रैफिक वीरेंद्र विज ने बताया कि जिले में कुल 1200 ट्रैफिक कर्मी हैं। इसमें राष्ट्रीय राजमार्ग पर 24 घंटे सेवाएं देने वाले कर्मचारी शामिल हैं।
एसडीआरएफ टीम में करीब 600 पुलिस सहयोगी
विंग कमांडर दिनेश यादव ने बताया कि उनके पास दो डोमेस्टिक फायर टिंडर, 12 प्रशिक्षित कर्मी हैं। सिविल डिफेंस के चीफ वार्डन मोहित शर्मा ने जानकारी दी कि 300 स्वयंसेवी उनके साथ जुड़े हैं। एसडीआरएफ के डीसीपी अशोक ने बताया कि उनकी टीम में करीब 600 पुलिस सहयोगी हैं। वह किसी बिल्डिंग के गिरने, राहत कार्य व सर्च ऑपरेशन जैसे कार्य करने में निपुण हैं। इसके अलावा करीब 164 मास्टर ट्रेनर हैं। ट्रेनिंग हाउस फिलहाल निर्माणाधीन है।
पुलिस आयुक्त व उपायुक्त ने कहा कि वह किसी भी समय मॉक ड्रिल के जरिए सभी दिशा-निर्देशों की तैयारी जांचने के लिए आदेश दे सकते हैं। ऐसे में सभी संबंधित विभाग अपने स्तर की तैयारी पूरी रखें। इस दोरान अग्निशमन विभाग, स्वास्थ्य विभाग, डीटीपी व अन्य सबंधित विभागों की तैयारियों का जायजा लिया गया।
आपदा प्रबंधन के लिए संसाधनों का रखें ब्यौरा
पुलिस आयुक्त विकास अरोड़ा व उपायुक्त अजय कुमार ने कहा कि आपदा के समय सरकारी संसाधनों के साथ साथ निजी क्षेत्र में मौजूद विकल्प भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं।अधिकारी सुनिश्चित करें कि शहर में निजी क्षेत्रों के पास उपलब्ध संसाधनों की जानकारी भी आपदा प्रबंधन के लिए जिला प्रशासन के पास मौजूद हो। आपदा का प्रकार और स्थिति अनुसार इनका भी इस्तेमाल सुनिश्चित करें। आईबी के सहायक निदेशक नरेश सारस्वत ने कहा कि आपदा के समय जरूरी है कि राहत घर या कैंप, ग्रामीण क्षेत्र में स्वयं सेवी व वायरलैस संपर्क संसाधन पहले से सुनिश्चित हो। आपदा प्रबंधन की जिला प्रोजेक्ट अधिकारी पूनम ने बताया कि उनके साथ 300 आपदा मित्र जुड़े हैं। इसमें से 20 आपदा मित्र इस गणतंत्र दिवस की परेड में हिस्सा लेंगे।