चंडीगढ़,9 नवंबर ( न्यूज़ अपडेट इंडिया ) । एचसीएस (हरियाणा सिविल सर्विस) ज्यूडिशियल पेपर लीक मामले में एसआइटी ने महिला आरोपी को दिल्ली से गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान सुनीता के तौर पर हुई है। वह नजफगढ़ की रहने वाली है। एसआइटी ने आरोपी को जिला अदालत में पेश किया। जांच टीम ने कोर्ट में कहा कि अभी दो अन्य आरोपियों के खिलाफ सबूत जुटाने हैं। इस मामले में कौन-कौन शामिल हैं, इस बारे में पूछताछ करनी है। पूरे मामले की शुरू से लेकर अब तक जो-जो हुआ उस बारे में सवाल किए जाने हैं, इसलिए आरोपी का पांच दिन का रिमांड दिया जाए। हालांकि कोर्ट ने उसे तीन दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया। बता दें, मामला सामने आने के बाद जस्टिस राजेश बिंदल, जस्टिस राजन गुप्ता और जस्टिस जीएस संधावालिया की पूर्ण पीठ ने चंडीगढ़ में ही मामले की एफआइआर दर्ज कर यूटी पुलिस को एसआइटी गठित कर जांच के आदेश दिए थे।
एसआइटी में एसपी रवि कुमार, डीएसपी कृष्ण कुमार व इंस्पेक्टर पूनम दिलावरी को सदस्य बनाय गया। यूटी पुलिस ने इस मामले में रजिस्ट्रार बलविंदर शर्मा, सुनीता निवासी नजफगढ़ और पंचकूला सेक्टर-5 निवासी सुशीला के खिलाफ केस दर्ज किया था।
रजिस्ट्रार बलविंदर शर्मा को किया जा चुका है निलंबित
इस मामले में रजिस्ट्रार (रिक्रूटमेंट) बलविंदर शर्मा को हाईकोर्ट के आदेश पर निलंबित किया जा चुका है। निलंबन के बाद उन्हें रोपड़ हेडक्वार्टर भेज दिया गया था। प्रारंभिक जांच में शर्मा दोषी पाया गया है। जांच में पता चला है कि बलविंदर शर्मा और सुनीता ने पिछले एक वर्ष में 760 बार फोन पर एक-दूसरे से बात की। दोनों ने एक दूसरे को एसएमएस किए थे। हालांकि, शर्मा ने जांच कमेटी में दर्ज करवाए बयान बताया है कि उसकी सुनीता से कोई बात नहीं हुई थी।
ऐसे हुआ था इस मामले का पर्दाफाश
पिंजौर निवासी सुमन ने एडवोकेट मंजीत सिंह के जरिए याचिका दायर कर कहा था कि हरियाणा ने एचसीएस ज्यूडिशियल के 109 पदों के लिए आवेदन मांगे थे। इसके लिए याची ने भी अप्लाई किया था। परीक्षा की तैयारी के लिए एक कोचिंग सेंटर भी ज्वाइन किया। इस दौरान उसकी दोस्ती एक लड़की सुशीला से हो गई, जिसने गलती से याची को एक ऐसी ऑडियो क्लिप भेज दी जिसमें वह अन्य लड़की से डेढ़ करोड़ में नियुक्ति की बात कर रही थी।
जब याची ने सुशीला से पूछा तो उसने वह ऑडियो क्लिप डिलीट कर दी। जब उसने जोर देकर पूछा पेपर लीक होने की बात पता चली। सुशाली ने याचिकाकर्ता को छह सवाल भी बताए जो परीक्षा में आने थे। 16 जुलाई को परीक्षा हुई तो बताए गए सवाल पेपर में आए थे। याचिकाकर्ता ने अपने पति को इसकी जानकारी दी और उन्होंने उन्होंने इसकी शिकायत पुलिस और हाईकोर्ट को एडमिनिस्ट्रेटिव साइट पर दी।