गुरुग्राम। 85 फीसदी प्रतिशत किडनी खराब होने से मात्र 15 प्रतिशत किडनी पर जी रही 64 साल की बुजुर्ग महिला को यहां पार्क अस्पताल पालम विहार के डॉक्टर्स ने जीवनदान दिया। डॉक्टर्स की टीम ने सभी जांच करके महिला मरीज और किडनी डोनेट करने वाले उसके बेटे की सभी जरूरी जांच करके परिवार की सहमति से किडनी प्रत्यारोपण का निर्णय लिया।
पार्क अस्पताल पालम विहार के डॉक्टर्स की टीम ने किया यह कारनामा , 85 प्रतिशत किडनी हो चुकी थी खराब, महिला के जीवन पर मंडराया था खतरा
पार्क अस्पताल के सीईओ डा. सतीश चंद्र मिश्रा के मुताबिक 64 वर्षीय मरीज कृष्णा देवी को किडनी फेलियर के अंतिम स्टेज पर अस्पताल में लाया गया था। वह लगातार डायलिसिस ले रहीं थी। टाइप-2 डायबिटीज की वजह से उनकी किडनी फेल हो चुकी थी। परिवार की सहमति से कृष्णा देवी को उनके बेटे द्वारा डोनेट की गई किडनी प्रत्यारोपित की गई। अस्पताल में यूरोलॉजिस्ट डा. सुजीत कुमार, यूरोलॉजिस्ट डा. उदय, यूरोलॉजिस्ट डा. वसीम शेख व नेफ्रोलॉजिस्ट डा. नेहा की टीम ने कृष्णा देवी को जीवनदान देने में अहम भूमिका निभाई। किडनी प्रत्यारोपण के दौरान व बाद में कुछ भी हो सकता था। बहुत रिस्क था। परिवार को यह पहले से अवगत करा दिया गया था। परिवार ने डॉक्टर्स पर भरोसा जताया और भगवान से प्रार्थना की। परिवार की सहमति से डॉक्टर्स की टीम ने महिला का सफलता से किडनी प्रत्यारोपण किया।
53 साल के शमशाद खान का भी सफल किडनी प्रत्यारोपण
डॉक्टर्स ने बताया कि एक अन्य मरीज 53 वर्षीय मोहम्मद शमशाद खान अंतिम चरण की किडनी फेलियर से पीडि़त थे। पिछले 6 महीने से हीमोडायलिसिस पर थे। उनके मामले में किडनी फेलियर का कारण गुर्दे की पथरी की बीमारी थी। उन्होंने किडनी ट्रांसप्लांट कराने की इच्छा व्यक्त की। क्योंकि वह सप्ताह में तीन बार हीमोडायलिसिस पर रहने की पीड़ा नहीं झेल सकते थे। उनके भाई प्रवेज खान एक स्वैच्छिक किडनी डोनर के रूप में आगे आए। नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. नेहा सिंह के अनुसार मरीज ने इंजेक्शन रिटक्सिमैब, प्लास्मफेरेसिस, इंजेक्शन एटीजी के रूप में अपने एंटीबॉडी टाइटर को कम करने के लिए आवश्यक डिसेन्सिटाइजेशन प्रोटोकॉल से गुजरा। एंटी एबीओ एंटीबॉडी टाइटर सर्जरी डॉ. सुरजीत कुमार के नेतृत्व में डॉ. उदय और डॉ. वसीम शेख के साथ तीन विशेषज्ञ सर्जनों की टीम द्वारा सफलतापूर्वक की गई। मरीज को आठवें दिन छुट्टी दे दी गई।