पंचकूला,5 नवंबर ( न्यूज़ अपडेट इंडिया ) : डेंगू और मलेरिया ने इस समय पंचकूला के लोगों को अपनी चपेट में लेने में कोई कसर नहीं छोड़ रखी है। डेगू और मलेरिया में पिछले सालों के रिकॉर्ड टूट गए है। इस साल डेगू का डंक काफी तेज रहा है। जिले में डेगू के लगभग 169 और मलेरिया के 185 केस सामने आए है। सेक्टर-19 के एक नाबालिग ने जीएमसीएच चंडीगढ़ में डेगू के चलते दम तोड़ दिया था। हालांकि स्वास्थ्य विभाग लगातार यही दावा कर रहा है कि पंचकूला में डेगू से कोई मौत नहीं हुई है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से पंचकूला के ऐसे सेंसेटिव एरियों में चेकिंग की जहा से अब तक डेंगू के पॉजिटिव केस रहे हैं। वहीं, बरवाला में भी टीम की ओर से चेकिंग की गई जहा से टीम को दो जगह से डेंगू का लारवा मिला। इसके बाद हेल्थ डिपार्टमेंट की टीम ने उन घरों को वॉर्निग भी दी थी जहा से लारवा मिला। इसके बाद टीम ने पिंजौर और कालका एरिया में भी चेकिंग की। अभी तक डेंगू के सबसे ज्यादा केस देखने को मिल रहे हैं और ऐसे केस भी सामने रहे हैं जो पंचकूला के बॉर्डर एरिया से लगते हैं। ऐसे केसों से उन लोगों को सबसे ज्यादा खतरा बना रहता है जो उनके घरों के आसपास रहते हैं। ऐसे में इन केसों को आइडेंटीफाई करना भी काफी मुश्किल होता है।
इस साल सामने आए 185 मरीज
जिले में मलेरिया के जहां इस साल करीब 185 मरीज सामने आए है, वह वर्ष 2016 में 175, 2015 में 105, 2014 में 120 थे। 2017 में सबसे ज्यादा मलेरिया 50-60 के मामले पंचकूला के शहरी क्षेत्र ओल्ड पंचकूला से आए हैं। इसके पीछे मुख्य वजह है पानी की किल्लत है। पेयजल की समस्या के चलते ओल्ड पंचकूला के स्थानीय लोग अपने घर में कई दिनों तक पानी स्टोर करके रखते हैं। नतीजा एक सप्ताह से ज्यादा पानी स्टोर करने पर मलेरिया और डेंगू के लारवा स्टोर किए गए पानी में पनप जाते हैं।
ये हैं लक्षण
-अनीता वासुदेवा ने बताया कि मलेरिया में अचानक तेज बुखार सर्दी देकर कंपकपी के साथ आता है। यह स्थिति 15 मिनट से लेकर एक घटे तक हो सकती है।
-रोगी को अपने शरीर से गर्मी एवं जलन महसूस होती है। इससे अचानक सिर दर्द हो सकता है।
-मलेरिया का बुखार तेज पसीना छूटने के साथ घटने लगता है। यह स्थिति दो से चार घटे तक रह सकती है।
-बुखार बार-बार कुछ निश्चित अवधि के बाद आता हैं। जब भी बुखार ठंड एवं कंपकपी के साथ आया है तो यह आशका हो सकती है कि उसे मलेरिया हो सकता है।
ऐसे करें बचाव
-बचाव के लिए रात में सोते समय मच्छरदानी अवश्य लगाएं।
-शाम के समय शरीर में नीम या करंज का तेल लगाने से मच्छर नहीं काटते।
-घर के आस-पास के गड्ढों और नालियों में पानी जमा न होने दें।
-घर के आसपास झाड़ियों में मच्छर छिपते हैं। इन झाड़ियों को काटकर साफ कर दें।
-टूटे-फूटे बर्त्तन, घड़े, पुराने टायर आदि में पानी जमा न होने दें।
-नीम के तेल को पानी में मिलकर स्प्रे करने से मच्छर मरते हैं।
-डीडीटी या किसी अन्य कीटनाशक का समय-समय पर छिड़काव कराते रहें।