सिरसा,4 नवंबर ( न्यूज़ अपडेट इंडिया ) । डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम को सजा होने के 70 दिन बाद शनिवार को पहली बार डेरे के गेट नामचर्चा के लिए खुले। डेरे की प्रबंधक कमेटी ने शाह मस्ताना शाह के अवतार दिवस पर नामचर्चा रखी। नामचर्चा में डेरा प्रमुख की माता नसीब कौर, बेटा जसमीत और दामाद शान ए मीत भी शामिल हुए। नामचर्चा में पहले भजन गाए गए और फिर डेरा प्रमुख की रिकार्डिंग वीडियो अनुयायियों के बीच चलाई गई। फिर नसीब कौर ने गरीब परिवारों को राशन वितरित किया गया। इसके बाद डेरे के ब्लड बैंक में रक्तदान शिविर लगाया गया, जिसमें 250 से अधिक लोगों ने रक्तदान किया। गौरतलब है कि पंचकूला व सिरसा में हिंसा के बाद प्रदेश भर के नामचर्चा घरों को सील कर दिया गया था, जबकि सिरसा डेरे में सर्च अभियान चलाया गया था। उसे सील नहीं किया गया था। बृहस्पतिवार को सिरसा डेरे में पहुंचे कोर्ट कमिश्नर एकेएस पंवार ने भी कहा था कि डेरे में गतिविधियों पर कोई बैन नहीं है। साध-संगत जाना चाहे तो उन्हें मनाही नहीं है।
पूर्व की भांति हुई तलाशी, मोबाइल रखवाए बाहर
डेरे में नामचर्चा की जानकारी डेरा अनुयायियों तक ही भिजवाई गई। यहां कार्यक्रम की भनक पूर्व में किसी को नहीं लगने दी गई। डेरे में पहली बार पांच व तीन नंबर गेट खोल दिए गए। इन्हीं गेटों से अनुयायियों की एंट्री करवाई गई। अनुयायियों की पहले की तरह तलाशी हुई और सभी के मोबाइल बाहर रखवाए गए।
फतेहाबाद में नामचर्चा घर खोलने की फिलहाल अनुमति नहीं
उधर फतेहाबाद के जिला उपायुक्त हरदीप सिंह का कहना है कि उनके जिले में बंद पड़े नामचर्चा घरों को फिलहाल खोलने की अनुमति नहीं है। बता दें कि प्रशासन ने 25 अगस्त को डेरा मुखी पर फैसला आने के बाद जिले के सभी नामचर्चा घर व कैंटीन जांच के बाद बंद करवा दिए थे। उसके बाद से अब तक जिले भर में नामचर्चा घर बंद है।