गुरुग्राम । रंगीन रोशनी के प्रकाश का पर्व दीवाली जिलाभर में धूमधाम से मनाया गया। सनातन धर्म का सबसे बड़ा पर्व दीवाली माना जाता है। भगवान राम के अयोध्या लौटने से भी इस पर्व को जोडक़र देखा जाता है। कहा जाता है कि जब भगवान राम 14 साल का वनवास काटकर अयोध्या लौटे थे तो लोगों ने घी के दीये जलाए थे। उसी परंपरा के अनुरूप ही दीवाली पर्व मनाया जाता है।
रंगीन रोशनी से नहाए घर, संस्थान, लोगों ने आपस में मिठाइयां बांटकर सांझा की दीवाली की खुशियां
दीवाली पर्व पर कई दिन पहले ही लोगों ने अपने घरों, संस्थानों में साफ-सफाई करके रंगीन लडिय़ों से सजा दिया था। दीवाली तक पूरा शहर, गांव रंगीन रोशनी में नहाए हुए थे। हालांकि ऐसा नजारा सप्ताह भर तक नजर आएगा। लोग धीरे-धीरे लडिय़ों को उतारेंगे। दीवाली की रात को पूजन के बाद लोगों ने जमकर आतिशबाजी भी की। भले ही दीवाली पर प्रदूषण के बहाने पटाखों पर बैन लगाया गया हो, लेकिन बैन कहीं नजर नहीं आया। दिन भर पटाखों की बिक्री भी खूब होती रही। गाड़ौली गांव, फर्रूखनगर रोड आदि स्थानों पर लोगों ने पटाखों के गोदाम बना रखे हैं। इन गोदामों में पटाखों की खूब बिक्री हुई। पटाखा विक्रेताओं में कई गुणा महंगे दामों में पटाखे बेचे। पुलिस, प्रशासन का पटाखे बेचने वालों में कोई डर नहीं था। ऐसा लग रहा था कि पटाखों पर कोई बैन लगा ही नहीं है। क्योंकि खुलेआम पटाखे लोग निडर होकर बेच और खरीद रहे थे।
दीपावली पर स्थानीय मंदिरों को भी सजाया गया। शहर के घरों की तरह सभी मंदिर भी रंगीन रोशनी में नहाए हुए थे। बाजार में रंगीन रोशनी के लिए हर साल कुछ ना कुछ नये प्रोडक्ट आते हैं, जिन्हें खूब पसंद किया जाता है। रंगीन रोशनी के लिए लडिय़ों व अन्य उत्पादों पर चाइना का पूरा कब्जा है। चाइनीज आइटम सस्ते मिलते हैं। इसलिए लोगों ने चाइनीज लडिय़ों को जमकर खरीदा। इस बार चाइनीज आइटम का बहिष्कार करने जैसी बातें नहीं उठीं।
जमकर हुई आतिशबाजी, नहीं दिखा पटाखों पर प्रतिबंध का असर, गोदामों में खुले आम बेचे जाते रहे पटाखे, विक्रेताओं में नहीं था कोई डर
लोगों ने घरों की सजावट के लिए खूब चाइनीज आइटम खरीदे। शाम के समय लोगों ने विधि-विधान से मां लक्ष्मी का पूजन किया। सुख-समृद्धि की कामना के साथ, सभी के हित, सभी के सुखी रहने का आशीर्वाद मांगा। दीवाली पर धन की देवी मां लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा की जाती है। इस बार दो दिन अमावस्या होने से दीवाली को लेकर काफी भ्रम की स्थिति बनी रही। कुछ ज्योतिषियों ने दिवाली 31 अक्टूबर को मनाना सही बताया। अमावस्या की रात 31 अक्टूबर को थी। कुछ विद्वानों 1 नवंबर को दिवाली मनाने की बात कही।