चंडीगढ़। जींद जिले की सफीदों विधानसभा सीट की बात की जाए तो सफीदों ने कभी बाहरी व्यक्ति का नहीं अपनाया और उसको हमेशा हार का मुंह देखना पड़ा है। अब तक 13 विधानसभा चुनाव में यहां से तीन बार निर्दलीय प्रत्याशी विधायक बने हैं। यहां से पांच बार कांग्रेस के विधायक बने हैं। वर्तमान में भी सुभाष गांगोली कांग्रेस के विधायक हैं। कांग्रेस ने विधायक सुभाष गांगोली पर ही विश्वास जताते हुए दोबारा से टिकट दी है। 2019 में कांग्रेस के सुभाष गांगोली ने बीजेपी के बचन सिंह आर्य को 3658 वोटों से मात दी थी। बीजेपी ने इस बार नारनौंद से विधायक राजकुमार गौतम को अपना प्रत्याशी बनाया है। उनकी टिकट के साथ ही बीजेपी नेता बचन सिंह आर्य, जसबीर देशवाल सहित अन्य नेताओं ने बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान कर रखा है। इस बार भी सुभाष गांगोली सेफ जोन में नजर आ रहे है।
सफीदों के लोगों ने बाहरी व्यक्ति को नहीं लगाया गले-
सफीदों की जनता कभी भी बाहरी व्यक्ति पर भरोसा नहीं करती है। 1987 में जब चौधरी देवीलाल और उनकी लोकदल पार्टी की आंधी थी, तब चौधरी देवीलाल ने सफीदों से रामचंद्र जांगड़ा को अपनी पार्टी का प्रत्याशी बनाया था। रामचंद्र जांगड़ा सफीदों के लिए ही नहीं, बल्कि जींद जिले के लिए भी बाहरी थे। उस समय चौधरी देवीलाल को लगता था कि वह जिसे भी जहां से अपनी पार्टी की टिकट दे देंगे, उसका विधानसभा में पहुंचना निश्चित है। उन्होंने सफीदों के लोगों की भावनाओं को दरकिनार करते हुए रामचंद्र जांगड़ा को सफीदों से चुनावी दंगल में उतार दिया था। सफीदों के लोगों ने रामचंद्र जांगड़ा का विरोध कर निर्दलीय प्रत्याशी सरदार सरदूल सिंह को चुनावी मैदान में उतार दिया।
देवीलाल की आंधी में भी हार गया था लोकदल का प्रत्याशी, सुषमा स्वराज की बहन वंदना शर्मा भी नही कर पाई थी जीत दर्ज
उस समय रामचंद्र जांगड़ा की जमानत जब्त हुई थी। इसी प्रकार फिलहाल बीजेपी प्रत्याशी रामकुमार गौतम ने 1991 में भी जनकल्याण मोर्चा की तरफ से सफीदों विधानसभा क्षेत्र में चुनाव लड़ा था। उस समय भी बाहरी का नारा लगा और उनको केवल 1570 वोट मिले थे। 2005 में कांग्रेस की लहर के बावजूद कांग्रेस प्रत्याशी कर्मवीर सैनी चुनाव हार गए थे। उनको 26077 वोट मिले थे। उनके खिलाफ भी बाहरी का नारा लगा था। कांग्रेस की बजाय 2005 में निर्दलीय बच्चन सिंह आर्य जीते थे। पूर्व केंद्रीय मंत्री दिवंगत सुषमा स्वराज की बहन डॉ. वंदना शर्मा भी वर्ष 2014 में बीजेपी की टिकट पर सफीदों से चुनाव लड़ चुकी है मगर वो भी चुनाव जीत नही पाई। उस समय सुषमा स्वराज एवं केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने भी उनके लिए प्रचार किया था। राजनाथ सिंह ने राजपूत बाहुल्य मुवाना गांव में आयोजित चुनावी सभा में लोगों से वंदना के लिए वोट की अपील की थी जबकि सुषमा स्वराज यहां कई दिन ठहरी थीं।
इसके अलावा 2009 के विधानसभा चुनाव में कुलदीप बिश्नोई ने अपनी पार्टी हरियाणा जनहित कांग्रेस से सोनीपत जिले के जय भगवान शर्मा को सफीदों से प्रत्याशी बनाकर मैदान में उतारा था। जयभगवान शर्मा युवा हजकां के प्रदेश अध्यक्ष थे। कुलदीप बिश्नोई को लगता था कि जय भगवान शर्मा सफीदों में ब्राह्मण मतदाताओं की बड़ी संख्या के आधार पर शानदार प्रदर्शन करेंगे, लेकिन जय भगवान शर्मा 3000 वोट भी नहीं ले पाए थे, और उनकी जमानत जब्त हो गई थी।
अब तक सफीदों से बने विधायक-
1967 श्रीकृष्ण
1968 सत्यनारायण
1972 धज्जा राम
1977 रामकिशन
1982 कुंदनलाल
1987 सरदूल सिंह
1991 बच्चन सिंह आर्य
1996 रामफल कुंडू
2000 रामफल कुंडू
2005 बच्चन सिंह आर्य
2009 कलीराम पटवारी
2014 जसबीर देशवाल
2019 सुभाष गांगोली