चंडीगढ़| हरियाणा में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच प्रदेश सरकार ने चुनाव आयोग से 31 अगस्त को कैबिनेट बैठक बुलाने की अनुमति मांगी है। इस बैठक में एक दिन के लिए विधानसभा का मानसून सत्र बुलाने या फिर विधानसभा भंग करने का लिया निर्णय जा सकता है।
हरियाणा विधानसभा का आखिरी सत्र 13 मार्च को बुलाया गया था, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल के इस्तीफे के बाद नए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विश्वास मत हासिल किया था। संवैधानिक रूप से छह महीने के अंतराल में एक बार विधानसभा सत्र बुलाना जरूरी है, इसलिए 12 सितंबर तक सदन की बैठक जरूरी है। अगर सरकार मानसून सत्र नहीं बुलाती तो फिर संवैधानिक संकट टालने के लिए मुख्यमंत्री को राज्यपाल से विधानसभा भंग करने की सिफारिश करनी होगी।
सरकार ने 31 को कैबिनेट बैठक के लिए चुनाव आयोग से मांगी अनुमति
मानसून सत्र बुलाने या फिर विधानसभा भंग करने का लिया जाएगा निर्णय
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने भी विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने के लिए राष्ट्रपति को चिट्ठी लिखी है। इसमें कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 174 (1) में स्पष्ट उल्लेख है कि विधानसभा के दो सत्रों के बीच छह महीने से ज्यादा का अंतराल नहीं होना चाहिए। आज तक कभी ऐसी स्थिति नहीं आई है कि छह महीने में कोई सत्र न बुलाया गया हो।
इस वक्त 14वीं विधानसभा चल रही है, जिसका कार्यकाल तीन नवंबर तक है। 15वीं विधानसभा के गठन के लिए एक अक्टूबर को मतदान होना है। ऐसे में सरकार सिर्फ किसी भी दिन सिर्फ एक घंटे के लिए सदन की बैठक बुलाकर औपचारिकताएं पूरी कर सकती है। अन्यथा विधानसभा भंग करने का विकल्प भी रहेगा।