चंडीगढ़। हरियाणा का राजनीतिक पारा इस समय शिखर पर है। प्रदेश में जहां भाजपा तीसरी बार सरकार बनाने का सपना देख रही है वहीं कांग्रेस दस साल का बनवास समाप्त करने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है। लोकसभा में दोनों दलों को पांच-पांच सीटों पर जीत हासिल हुई थी। हरियाणा में विपक्षी दल कांग्रेस की अगर बात की जाए तो कांग्रेस इस बार भी संगठन के बगैर ही चुनाव लड़ेगी।
आक्रामता छोड़ उपस्थिति दर्ज करवा रहा हुड्डा कैंप
कूल होकर कोल्डर वार लड़ रही सैलजा
भाजपा को नायाब बनाने की जुगत में नायब
अस्तित्व की लड़ाई लड़ेगी इनेलो, जजपा व आप
कांग्रेस की तरफ से नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने यह चुनाव प्रतिष्ठा का सवाल बनाया हुआ है। हुड्डा इस चुनाव के माध्यम से अपने बेटे को चंडीगढ़ सचिवालय में बिठाना चाहते हैं। इसके लिए उनके पास यह आखिरी अवसर है। क्योंकि 2029 के चुनाव में जहां पूरा परिदृश्य बदला हुआ होगा वहीं प्रदेश में विधानसभा सीटों की संख्या 90 से बढक़र 126 तक पहुंचेगी। प्रदेश में राजनीतिक समीकरण कांग्रेस के पक्ष में होने के बावजूद हुड्डा ने कांग्रेस का ग्राफ एक मुकाम पर पहुंचाकर छोड़ दिया है।
चुनाव करीब होने के बावजूद हुड्डा कैंप की आक्रामकता गायब है लेकिन उपस्थिति कायम है। कुमारी सैलजा कूल होकर कोल्ड वार लड़ रही हैं। कांग्रेस पार्टी के अंदरूनी समीकरण सैलजा के पक्ष में हैं। सैलजा के गोरिल्ला युद्ध से रणदीप सुरजेवाला जहां उनका समर्थन कर रहे हैं।
प्रदेश में यह भी प्रचारित किया जा रहा है कि बदले हुए हालातों में अगर जरूरत पड़ी तो तीसरी बार भाजपा की सरकार बनवाने में कांग्रेस के कुछ विधायकों की भूमिका अहम हो सकती है। लोकसभा चुनाव परिणाम के अगले दिन हरियाणा में भाजपा की जो स्थिति थी वह अब नहीं है। भाजपा ने एकजुटता के साथ मेहनत करते हुए अपनी स्थिति में सुधार किया है। मुख्यमंत्री नायब सैनी ने अपने करीब दो माह के कार्यकाल के दौरान घोषणाएं करने के साथ-साथ उनकी अधिसूचनाएं जारी करवाकर पुरानी परंपरा को तोडऩे का प्रयास किया है। लोगों में धीरे-धीरे भाजपा के प्रति नाराजगी और नकारात्मकता समाप्त हो रही है।
पिछले करीब दो दशक से हाशिए पर चल रही इनेलो की वर्तमान स्थिति कुछ ठीक नहीं है। प्रदेश के राजनीतिक माहौल में इनेलो कहीं फिट नहीं बैठ रही है। भाजपा और आईएनडीआईए गठबंधन इनेलो से दूरी बनाए हुए है। ऐसे में इनेलो इस बार भी अपनी उपस्थिति दर्ज करवाने के लिए चुनाव में उतरेगी। इनेलो विधायक अभय चौटाला को अपने ही विधानसभा हलके में चुनौती मिल रही है।
साढे चार साल तक सत्ता में रहे दुष्यंत चौटाला फिर से जेजेपी को खड़ा करने की कवायद में लगे हुए हैं। एक के बाद एक दुष्यंत के विधायक उन्हें छोड़ रहे हैं। इसके बावजूद वह पार्टी को प्रदेश की राजनीति में खड़ा करने में लगे हुए हैं। इस चुनाव में जेजेपी पहले जैसी स्थिति में नहीं होगी। आम आदमी पार्टी ने हरियाणा से सटे दिल्ली तथा पंजाब में भले ही सरकार बना ली हो लेकिन आप के लिए हरियाणा से चंडीगढ़ का फासला अभी दूर का है। प्रदेश के वर्तमान हालातों के अनुसार इनेलो,जेजेपी तथा आप यहां उपस्थिति दर्ज करवाने के लिए चुनाव लड़ेंगे। कई सीटों पर यह दल नंबर एक की बजाए नंबर दो की लड़ाई लड़ते हुए दिखाई देंगे।