चंडीगढ़। केन्द्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण 23 जुलाई को एनडीए सरकार के तीसरे कार्यकाल का पहला बजट पेश करेगी। जिसको लेकर राज्य कर्मचारियों के सबसे बड़े संगठन ऑल इंडिया स्टेट गवर्नमेंट एम्पलाइज फेडरेशन ने केन्द्रीय वित्त मंत्री को पत्र लिखकर बजट में कर्मचारियों की लंबित मांगों को मानने का ऐलान करने की मांग की है। फेडरेशन का कहना है कि अगर वर्ष 2024-25 केन्द्रीय बजट में कर्मचारियों की लंबित मांगों की अनदेखी की तो 13-14 अगस्त को हेदराबाद में राष्ट्रीय कार्यसमिति की मीटिंग बुलाई गई है।
जिसमें आम बजट में कर्मचारियों की मांगों बारे सरकार के रवैए को देखकर आगामी आंदोलन की कार्यनीति तैयार की जाएगी। ऑल इंडिया स्टेट गवर्नमेंट एम्पलाइज फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा ने यह जानकारी देते हुए बताया कि पिछले कई सालों से केन्द्र एवं राज्य कर्मचारी तथा शिक्षक अपनी अत्यंत जायज़ मांगों को लेकर देश भर में आंदोलन चलाए हुए थे। लेकिन सरकार ने कोई सुनवाई नहीं की। जिसका खामियाजा भाजपा को लोकसभा चुनाव में भी भुगतना पड़ा और भाजपा को साधारण बहुमत भी हासिल नहीं हो सका।
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जिसमें अन्य कारणों के साथ एक प्रमुख कारण कर्मचारियों एवं पेंशनर्स और उनके परिजनों की भारी नाराजगी भी थी। क्योंकि पिछले साल हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में तीन राज्यों में मिली जीत से उत्साहित सरकार ने आठवें पे कमीशन के गठन, पुरानी पेंशन बहाली,18 महीने के बकाया डीए / डीआर का भुगतान व आउटसोर्स संविदा कर्मियों की रेगुलराइजेशन आदि मांगों के मानने से बिल्कुल स्पष्ट मना कर दिया था। जिससे देश भर के कर्मचारी एवं उनके परिजन भाजपा से आक्रोशित हो गए थे।
राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री लांबा ने बताया कि केंद्र सरकार पीएफआरडीए एक्ट रद्द कर पुरानी पेंशन बहाली की बजाय जिन राज्यों ने पुरानी पेंशन बहाली की है, उनके जमा अंशदान को भी वापस करने से इंकार कर रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र एवं राज्य कर्मियों को पुरानी पेंशन बहाली की मांग में कोई बीच का रास्ता मंजूर नहीं है। उन्होंने ईपीएस 95 के सभी पेंशनर्स को परिभाषित पेंशन सिस्टम में लाने की मांग की। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री को लिखे पत्र में
आउटसोर्स / अनुबंध / दैनिक वेतनभोगी आधार पर की जा रही नियुक्तियों पर रोक लगाकर सभी प्रकार के अनुबंध कर्मचारियों को नियमित करने तथा सरकारी विभागों एवं पीएसयू में खाली पड़े पदों को शीघ्र अतिशीघ्र भरने की मांग को उठाया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार कारपोरेट टैक्स को घटाकर 30 से 22 प्रतिशत कर पूंजीपतियों को लाखों करोड़ की राहत प्रदान की है। उन्होंने इसी तरह वेतनभोगी के लिए इनकम टैक्स की छूट की सीमा बढ़ाकर दस लाख की मांग की।
उन्होंने बताया कि पत्र में पीएसयू के निजीकरण / निगमीकरण पर रोक लगाई लगाने और सरकारी विभागों का डाउन साइजिंग बंद करने,आठवें पे कमीशन के गठन, पे रिवीजन दस की बजाय पांच साल में करने व 18 महीने के बकाया डीए / डीआर सहित सभी बकाया डीए / डीआर का शीध्र भुगतान की मांग की गई है। उन्होंने बताया कि पत्र में केंद्र एवं राज्य के संबंधों को पुनः परिभाषित करने की मांग भी की है। क्योंकि पे रिवीजन और बकाया डीए / डीआर का भुगतान करने के लिए केन्द्र सरकार द्वारा सभी राज्यों को प्रयाप्त फंड आवंटित करने की जरूरत है। क्योंकि राज्य सरकारों के पास इसके लिए प्रयाप्त फंड का भारी अभाव है।