चंडीगढ़। मुख्यमंत्री के चीफ मीडिया को-आर्डिनेटर सुदेश कटारिया ने कहा कि "संविधान हत्या दिवस" हर भारतीय के अंदर लोकतंत्र की रक्षा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की अमर ज्योति को जीवित रखने का काम करेगा, ताकि कांग्रेस जैसी कोई भी तानाशाही मानसिकता भविष्य में इसकी पुनरावृत्ति न कर पाए।
उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा 25 जून को हर साल संविधान हत्या दिवस मनाने के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि पिछले दिनों लोकसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस ने संविधान बचाने का पाखंड फैलाकर दलित समाज को गुमराह करने का काम किया था। मगर संविधान निर्माता बाबा साहेब भीमराव अंबडेकर की दलित हितों आवाज को न केवल कांग्रेस ने दबाया बल्कि आपातकाल लगाकर बाबा साहेब की आत्मा पर कुठाराघात किया है।
उन्होंने कहा कि 25 जून को संविधान हत्या दिवस के रूप में मनाने का फैसला, आने वाली पीढ़ियों को आपातकाल की यातनाएं और उत्पीड़ने के काले अध्याय के बारे में अवगत कराता रहेगा।
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उन्होंने कहा कि उस समय की तत्कालीन सरकार ने सत्ता का दुरुपयोग करके देश के लोगों पर ज्यादतियां और अत्याचार किए थे। भारत संविधान और लोकतंत्र की मजबूती के लिए दृढ़ निश्चय रखने वाले लोगों पर अत्याचार करके कांग्रेस ने उन्हें तोड़ने की कोशिश की गई, लेकिन वह अपने फैसले पर अडिग रहे।
उन्होंने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 25 जून 1975 को अपनी तानाशाही मानसिकता को दर्शाते हुए देश में आपातकाल लगाकर भारतीय लोकतंत्र की आत्मा का गला घोंटने का काम किया था। लाखों लोगों को अकारण जेल में डाल दिया गया और मीडिया की आवाज को दबाया गया। भारत सरकार ने हर साल 25 जून को 'संविधान हत्या दिवस' के रूप में मनाने का निर्णय किया है। यह दिन उन सभी लोगों के विराट योगदान का स्मरण कराएगा, जिन्होंने 1975 के आपातकाल के अमानवीय दर्द को झेला था।
आपातकाल में देश ने झेला सत्ता का दुरुपयोग
मुख्यमंत्री के चीफ मीडिया को-आर्डिनेटर सुदेश कटारिया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की केंद्र सरकार ने आपातकाल की अवधि के दौरान सत्ता के घोर दुरुपयोग का सामना और संघर्ष करने वाले सभी लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए 25 जून को 'संविधान हत्या दिवस' घोषित किया है, वह सराहनीय कदम है। उन्होंने संविधान हत्या दिवस मनाने का फैसला लेने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का आभार जताया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के फैसले से यातनाएं सहने वाले लोगों को इंसाफ मिला है।