चंडीगढ़, 20 अगस्त। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने साफ कर दिया है कि प्रदेश सरकार द्वारा लागू की गई परिवार पहचान पत्र योजना अभी चल रही है। अभी तक सरकार ने इसे अनिवार्य नहीं किया है। इसके बावजूद स्वेच्छा से 64 लाख से अधिक परिवार अपना पंजीकरण करवा चुके हैं।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल शुक्रवार को विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक नीरज शर्मा द्वारा उठाए गए सवाल का जवाब दे रहे थे। सदन में कांग्रेस विधायक किरण चौधरी ने परिवार पहचान-पत्र के अंतर्गत राज्य के परिवारों से लिए जा रहे डॉटा के चोरी होने की आशंका भी जताई। मुख्यमंत्री ने प्रदेश वासियों का डाटा चोरी होने की तमाम आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि अभी तक लगभग 64 लाख परिवार यानी 2 करोड़ बीस लाख 48 हजार लोग रजिस्ट्रेशन करवा चुके हैं। केवल दस प्रतिशत और परिवारों का पंजीकरण होना बाकी है। रजिस्ट्रेशन के दौरान सभी परिवार अपनी सालाना आय खुद ही बता रहे हैं।
सरकार इसका वेरिफिकेशन भी करवा रही है। अभी तक 48 हजार ऐसे परिवारों की पहचान की गई है, जिनकी सालाना आय 1 लाख रुपये से भी कम है। इनमें 30 हजार परिवार ऐसे हैं, जिनकी सालाना आय 50 हजार से भी कम है। खट्टर ने कहा, सरकार ने तय किया है कि इस साल कम से कम 1 लाख परिवारों को चिह्नित कर उनकी सालाना आय बढ़ाकर 1 लाख रुपये तक की जाएगी। बाद में इसे 1 लाख 80 हजार रुपये तक करेंगे। ऐसे सभी परिवारों को केंद्र व राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ मिलेगा।
सीएम ने रजिस्ट्रेशन के आधार पर कहा कि प्रदेश में प्रति व्यक्ति सालाना आय 61 हजार 558 तथा परिवार की सालाना आय औसतन 2 लाख 47 हजार 962 रुपये है। इस पर सवाल दागते हुए नीरज शर्मा ने कहा, अगर ऐसा है तो यह चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि पिछले साल की आर्थिक रिपोर्ट के हिसाब से तो राज्य की प्रति व्यक्ति आय दो लाख 39 हजार से अधिक थी। अगर प्रति व्यक्ति आय कम दर्ज हुई तो बड़ी कंपनियां राज्य में निवेश ही बंद कर देंगी। इसका जवाब देते हुए सीएम ने कहा, आर्थिक रिपोर्ट में प्रति व्यक्ति आय जीडीपी दर के हिसाब से तय होती है। परिवार पहचान-पत्र के जरिये हर व्यक्ति की आय का पता कर रहे हैं।