चंडीगढ़, 17 अगस्त। हरियाणा में जमीनी विवादों की सुनवाई के लिए प्रशासनिक सचिवों की सुविधाओं में बढ़ोतरी होगी। रेवन्यू मामलों की सुनवाई के लिए स्थापित 'पेशी अदालतों' में अब स्थाई स्टॉफ होगा। एफसीआर तथा राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजीव कौशल ने पेशी अदालतों के लिए 27 नए अधिकारियों-कर्मचारियों के पदों को मंजूरी दी है। इस बाबत विभाग के अंडर सेक्रेटरी को प्रबंध करने के आदेश दिए हैं।
दरअसल, चंडीगढ़ के सेक्टर-17 स्थित हरियाणा के न्यू मिनी सचिवालय में दो 'पेशी अदालते' स्थापित हैं। सरकार ने रेवन्यू के मामलों की सुनवाई के लिए प्रशासनिक सचिवों को जिले अलॉट किए गए हैं। आमतौर पर सप्ताह में एक बार प्रशासनिक सचिव जमीनों से जुड़े विवादों की सुनवाई करते हैं।
रेवन्यू से जुड़े मामलों की सुनवाई पहले एसडीएम के स्तर पर होती है। एसडीएम के फैसलों के खिलाफ डीसी की कोर्ट में याचिका दायर करने के प्रावधान हैं।
डीसी के फैसलों को मंडलायुक्तों की अदालतों में चुनौती दी जा सकती है। मंडलायुक्तों के फैसलों से भी अगर संतुष्टि नहीं होती तो फिर इन मामलों के लिए मुख्यालय स्तर पर प्रशासनिक सचिव सुनवाई करते हैं। चंडीगढ़ में दो पेशी अदालतें तो बनाई हुई थी, लेकिन इनमें स्टॉफ का प्रबंध नहीं था। ऐसे में प्रशासनिक सचिवों को सुनवाई के दौरान चपरासी से लेकर जजमेंट राइटर तक अपने साथ लाने होते थे। एफसीआर संजीव कौशल ने इस परेशानी को महसूस करते हुए अब स्टॉफ का प्रबंध करने के आदेश दिए हैं।
नई व्यवस्था में यह भी प्रावधान किया जाएगा कि पेशी अदालतों के बाद हरियाणा पुलिस के जवान की ड्यूटी तय हो। एएसआई या कम से कम हेड कांस्टेबल रैंक के पुलिस जवान को पेशी के दौरान अदालत के बाहर मौजूद रहेगा होगा ताकि किसी तरह का व्यवधान कोर्ट कार्रवाई में पैदा न हो।