चंडीगढ़, 29 जून। टीबी रिपोर्ट 2021 के अनुसार भारत में टीबी के 23 लाख 28 हजार 338 मामले हैं, जिनमें से 62 हजार 697 मामले हरियाणा में सामने आए हैं। इस बीमारी से हरियाणा में 2809 मौतें हुईं हैं। टीबी-एचआईवी से हरियाणा में 73 मौतें हुई हैं। जबकि 3321 बच्चे टीबी से ग्रस्त पाए गए हैं।
यह जानकारी मंगलवार को गर्भवती महिलाओं में क्षय रोग (टीबी) का पता न चलने की घटनाओं को मद्देनजर हरियाणास्वास्थ्य विभाग द्वारा महिला एवं बाल विकास विभाग के सहयोग से डिजिटल रूप से टीबी जन आंदोलन नामक एक संवेदी कार्यशाला में सामने आई।
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स्वास्थ्य विभाग के प्रवक्ता ने यह जानकारी देते हुए कहा कि कार्यशाला के दौरान यह बताया गया कि सरकार द्वारा टीबी रोगियों की सुविधा के लिए ‘निक्षय पोषण योजना’, ‘सूचना प्रोत्साहन योजना’, ‘उपचार समर्थक योजना’ और ‘निजी प्रदाता अधिसूचना योजना’ नामक चार योजनाएं चलाई जा रही हैं जिसके तहत टीबी रोगियों और उनकी देखभाल करने वालों को प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के माध्यम से वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। कार्यशाला के दौरान इस संबंध में विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया।
डब्ल्यूएचओ के सलाहकार डॉ. अनुज झांगडा ने कहा कि गर्भावस्था में होने वाले शारीरिक परिवर्तनों का टीबी महामारी पर प्रभाव पड़ता है। इसके अलावा, गर्भावस्था के दौरान प्रतिरक्षात्मक परिवर्तन इस वर्ग में नए संक्रमणों के साथ-साथ अप्रत्यक्ष संक्रमणों की सक्रियता को अधिक सामान्य बना देते हैं।
डॉ. अनुज ने अपने प्रस्तुतीकरण में गर्भवती महिलाओं मेें टीबी होने के कारणों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महिलाओं से अपेक्षा की जाती है कि वे परिवार में टीबी रोगी की देखभाल करें जिसके कारण टीबी के निदान से पहले या बाद में उनके संपर्क में आने से वह टीबी की चपेट में आ जाती हैं।
इससे पूर्व एडवोकेसी कम्युनिकेशन सोशल मोबिलजेशन ऑफिसर सुश्री सरिता नारयाल ने बताया इस अवसर पर स्वास्थ्य सेवाएं के अतिरिक्त महानिदेशक डॉ. वी.के. बंसल, उपनिदेशक टीबी डॉ.सुषमा अरोड़ा, डॉ. वर्षा एवं डॉ. अंजलि अरोड़ा भी उपस्थित थी।