चंडीगढ़। हरियाणा में सरकारी स्वास्थ्य ढांचे का विस्तार एवं मजबूत करके कोरोना की संभावित तीसरी लहर से निपटने की मांग को लेकर शुक्रवार को कर्मचारी संगठनों द्वारा प्रदेश भर में प्रदर्शन किए गए। उपायुक्त कार्यलयों पर किए गए प्रदर्शनों के उपरांत मुख्यमंत्री को संबोधित 11 सूत्रीय मांगों के ज्ञापन उपायुक्तों को सौंपे गए।
सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा और जन स्वास्थ्य अभियान के संयुक्त आह्वान पर आयोजित इन प्रदर्शनों में सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा व जन स्वास्थ्य अभियान के अलावा हरियाणा ज्ञान-विज्ञान समिति, जनवादी महिला समिति,सीटू, एसएफआई व डीवाईएफआई से जुड़े हजारों की तादाद में कर्मचारियों, महिलाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं,मजदूरों, छात्रों ने भाग लिया।
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सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष लांबा, महासचिव सतीश सेठी व स्वास्थ्य विभाग कर्मचारी तालमेल कमेटी के संयोजक राजबीर बेरवाल और जन स्वास्थ्य अभियान के संरक्षक डाक्टर रणबीर सिंह दहिया, संयोजक सतनाम सिंह व सह संयोजक सुरेश उचाना ने शुक्रवार को आयोजित प्रदर्शनों की सफलता का दावा करते हुए कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के अनुरूप उप स्वास्थ्य केन्द्र, प्राइमरी हैल्थ सैंटर, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र व जरनल हस्पताल खौलने, बड़ी तादाद में खाली पड़े मेडिकल व पैरामेडिकल स्टाफ के पदों को स्थाई नियुक्ति से भरने, स्वास्थ्य को मौलिक अधिकार बनाने, आक्सीजन, बेड्स व वेंटिलेटर सहित अन्य सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवाने समेत कई मांगे रखी गई हैं।
कर्मचारी नेताओं ने कहा कि सरकार ने इतने संवेदनशील मुद्दे पर भी कोई दिलचस्पी नहीं ली।
उन्होंने आंकड़े देते हुए बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यू.एच.ओ.) के मानकों अनुसार ग्रामीण इलाकों में हर नागरिक को संपूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए पांच हजार की आबादी पर एक उप स्वास्थ्य केंद्र, 30 हजार की आबादी के लिए एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और 80 हजार से 1 लाख 20 की आबादी पर एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि फिलहाल प्रदेश में 2667 उप स्वास्थ्य केंद्र, 532 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 128 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित हैं। जबकि वर्तमान आबादी की जरूरतों के हिसाब से हमारे पास 634 उपस्वास्थ्य केंद्रों, 81 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और 53 सामुदायिक केंद्रों की कमी बनी हुई है। यानि वर्तमान में स्वास्थ्य सेवाओं का ढांचा जितना होना चाहिए, उतना नहीं है और जितना है, उनमें भी स्पेशलिस्ट डॉक्टरों, डॉक्टरों, स्टॉफ नर्सों, रेडियोग्राफरों, फार्मासिस्टों, लैब तकनीशियों और मल्टीपर्पज कैडर की भारी कमी बनी हुई है।