चंडीगढ़। प्रदेश में किसी भी प्रकार के कानून की उल्लंघना करने के मामलों का सामना कर रहे किशोरों को अब कानूनी जांच प्रक्रिया से लेकर केस निपटान होने तथा जरूरतमंद बालकों की देखभाल और उनके रखरखाव को लेकर आने वाली चुनौतियों का दौर अब खत्म होने जा रहा है। रविवार से प्रदेश में एकीकृत बाल संरक्षण परिसर की श्रृंखला के निर्माण की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है, जिससे प्रदेश में न केवल ऐसे किशोरों को रखने में कम क्षमता को लेकर आड़े आ रही जगह की कमी का निवारण होगा, अपितु सुरक्षा संबंधी जोखिम भी खत्म होंगे। हरियाणा में अपराध करने तथा कानूनन दोषी करार दिए जाने के बाद किशोरों को अलग-अलग श्रेणी के अनुसार विभिन्न गृहों में रखने की व्यवस्था की जाती है। इसमें प्रदेश में निरीक्षण गृह में कानून के उल्लंघन में संलिप्त होने तथा एफआईआर दर्ज होने के बाद रखा जाता है। विशेष गृह में दोषी करार दिए गए किशोर को, सुरक्षित गृह में गंभीर अपराध में दोषी करार दिए गए (16 साल से 18 साल) किशोर को तथा देखभाल और संरक्षण की श्रेणी में आने वाले बालकों को बाल देखभाल संस्थान में रखा जाता है।
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यही नहीं किशोर न्याय अधिनियम 2015 के तहत नियमों में हुए बदलाव के अनुरूप भी एकीकृत बाल संरक्षण परिसर स्थापित करने की आवश्यकता हुई। इसके मद्देनजर मुख्य सचिव हरियाणा द्वारा वर्ष 2018 में सोनीपत, गुरूग्राम, हिसार और अंबाला में एकीकृत बाल संरक्षण परिसर बनाने के लिए 8-8 एकड जमीन चिन्हित करने के निर्देश उपायुक्तों को दिए गए थे। जिसको लेकर किशोर न्याय निगरानी समिति की बैठक पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जसवंत सिंह द्वारा लेते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए थे। प्रदेश में पहले एकीकृत बाल संरक्षण परिसर के तौर पर सोनीपत के गांव जाजी में आठ एकड़ जमीन चिन्हित करके विभाग को मई 2019 में जमीन स्थानांतरित करने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई। रविवार को मुख्यमंत्री मनोहर लाल प्रदेश में पहले भवन की आधारशिला वीडिया कांफ्रेंसिंग के माध्यम से रखेंगे।