चंडीगढ़। हरियाणा में जहां बरौदा विधानसभा उपचुनाव को लेकर राजनीतिक उठापटक शुरू हो गई है और सभी दलों ने अभी से जीत के दावे करने शुरू कर दिए हैं वहीं इस विधानसभा क्षेत्र से जुड़ी दिलचस्प बात यह है कि यहां पिछले पचास वर्षों में एक बार भी ऐसा अवसर पर नहीं आया है जब इस हलके में भाजपा को जीत नसीब हुई है। भाजपा के हालात इस कद्र दयनीय रहे हैं कि एक चुनाव को छोडक़र भाजपा कभी भी दूसरे नंबर पर भी नहीं आई है। ऐसे में निकट भविष्य में होने वाले बरौदा का उपुचनाव सत्तारूढ़ भाजपा के लिए सबसे अहम होगा। जाटलैंड के हलका बरौदा में अगर कमल खिल जाता है तो मुख्यमंत्री को इसके ढेरों लाभ होंगे।
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एक नवंबर 1966 को हरियाणा बने के बाद हुई हदबंदी में बरौदा विधानसभा क्षेत्र को अनुसूचित जाति आरक्षित विधानसभा क्षेत्र का दर्जा दिया गया। 1967 में जब पहली बार चुनाव हुए तो यहां से कांग्रेस के आर.डाहरी ने भारतीय जन संघ के डी. सिंह को हराया। वर्ष 2008 में जब नए सिरे से हदबंदी हुई तो बरौदा को आरक्षित हलके से बाहर करके सामान्य श्रेणी की सूची में डाल दिया गया।
इस विधानसभा क्षेत्र में आजतक कुल 13 चुनाव हुए हैं लेकिन किसी भी राजनीतिक दल ने कभी महिला को चुनाव मैदान में नहीं उतारा है। अब तक हुए चुनावों में सबसे अधिक कांग्रेस पांच बार, इनेलो तथा लोकदल के विधायक दो-दो बार विजयी हुए हैं। इस सीट से विश्व हिंदू परिषद, जनता पार्टी जैसे राजनीतिक दल भी जीत का स्वाद चख चुके हैं। ऐसे में यह चुनाव भाजपा के लिए सबसे अधिक महत्व रखता है। इस चुनाव में भी जींद जैसे राजनीतिक समीकरण बनते जा रहे हैं।
वर्ष विजयी नेता राजनीतिक दल
1967 आर.डाहरी आईएनसी
1968 श्याम चंद वीएचपी
1972 श्याम चंद आईएनसी
1977 भाले राम जेएनपी
1982 भाले राम एलकेडी
1987 किरपा राम एलकेडी
1991 रमेश कुमार जेपी
1996 रमेश कुमार एसएपी
2000 रमेश कुमार खटक आईएनएलडी
2005 रामफल आईएनएलडी
2009 श्रीकृष्ण आईएनसी
2014 श्रीकृष्ण आईएनसी
2019 श्रीकृष्ण आईएनसी
चुनाव परिणाम---2019
राजनीतिक दल प्रत्याशी वोट
कांग्रेस श्रीकृष्ण हुड्डा 42566
भाजपा योगेश्वर दत्त 37726
जजपा भपिंदर 32480
बसपा नरेश 03281
इनेलो जोगिंदर 03145