चंडीगढ़, 08 जुलाई। हरियाणा की मनोहर सरकार ने एक बार फिर से पूर्व हुड्डा सरकार के कार्यकाल में लिए गए बोर्ड परीक्षा रद्द करने के फैसले को बदल दिया है। अब हरियाणा में फिर से आठवीं कक्षा के लिए बोर्ड परीक्षाओं का आयोजन होगा। इससे पहले प्रदेश में अंतिम बार 2010 में बोर्ड परीक्षाओं को आयोजन किया गया था। अध्यापक संगठनों की सरकार के इस फैसले पर मिली जुली प्रतिक्रिया है। सरकार का यह फैसला इसी सत्र से लागू होगा। अतार्थ अगले साल मार्च माह में आठवीं की परीक्षाएं बोर्ड द्वारा आयोजित की जाएंगी।
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प्रदेश में वर्ष 2009-10 में अंतिम बार आठवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा हुई थी। करीब 11 साल के लंबे अंतराल के बाद मौलिक शिक्षा निदेशक ने हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के सचिव को आठवीं की बोर्ड परीक्षाएं लेने के आदेश जारी कर दिए हैं।
हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की अभी तक 10वीं और 12वीं कक्षा की परीक्षा होती है। राइट टू एजुकेशन एक्ट लागू होने के बाद दस साल पहले आठवीं कक्षा का बोर्ड हटा दिया गया था। आठवीं कक्षा तक कोई बच्चा फेल नहीं करने की नीति से छात्रों में डर खत्म हो गया था जिससे विद्यार्थी पढऩे में कम दिलचस्पी रखने लगे। इसके चलते शिक्षा स्तर में गिरावट आई और 10वीं और बारहवीं में बोर्ड रिजल्ट गिरता चला गया।
मनोहर सरकार ने दूसरे कार्यकाल के दौरान विधानसभा में आठवीं में बोर्ड परीक्षाएं शुरू कराने का बिल पारित करा लिया था। अब शिक्षा विभाग ने विधिवत रूप से आठवीं की बोर्ड परीक्षाओं के लिए हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के सचिव को आदेश जारी कर दिए हैं। निदेशालय ने यह भी कहा है कि बोर्ड द्वारा इस संबंध में की गई आगामी कार्रवाई से निदेशालय को भी अवगत करवाया जाए ताकि निदेशालय उसके मुताबिक आगामी रूपरेखा तैयार कर सके।
निदेशालय मौलिक शिक्षा विभाग ने पत्र में कहा है कि सरकार ने आठवीं कक्षा में बोर्ड परीक्षा को लागू कर दिया है। सरकार ने हरियाणा निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार नियम-2011 में बदलाव करके कक्षा आठवीं का बोर्ड आरंभ किया जाए। शैक्षणिक वर्ष के अंत में यदि विद्यार्थी न्यूनतम पास अंक प्राप्त नहीं करता तो उसे पास होने के लिए दो अवसर अन्य प्रदान किए जाएं। उसे फेल न करके अनुपूरक परीक्षा (प्रत्येक विषय में) देने का अवसर दिया जाए। कक्षा में स्टूडेंट असस्मेंट टेस्ट के आधार पर ही बच्चों का वर्गीकरण कर लिया जाए। उनके लिए उपचारात्मक शिक्षण, अतिरिक्त सहायक सामग्री व अतिरिक्त अभ्यास सामग्री की व्यवस्था की जाए। इसके अलावा सतत एवं समग्र मूल्यांकन की व्यवस्था की जाए।