गुरुग्राम। यह निजी स्कूल की दबंगई ही कही जाएगी कि बच्चों की फीस भरने में असमर्थ अभिभावकों पर पहले तो फीस भरने का दबाव बनाया गया। दबाव से भी काम नहीं चला तो स्कूल की तरफ से बच्चों की ऑनलाइन कक्षाओं के लिए बनाई गई आईडी ही ब्लॉक कर दी। जब अभिभावकों ने इस बारे में पूछा तो स्कूल ने इसे तकनीकी खराबी बताकर अभिभावकों को गुमराह किया। सुप्रीमकोर्ट के आदेश हैं कि किसी भी बच्चे से स्कूल वह फीस ना वसूले, जो स्कूल खुलने के समय ली जाती थी। क्योंकि आज किसी स्कूल का इंफ्रास्ट्रक्चर उपयोग नहीं हो रहा। लेकिन शायद गुरुग्राम के इस स्कूल को सुप्रीमकोर्ट के आदेशों की भी परवाह नहीं है।
यहां सेक्टर-31 स्थित अजंता पब्लिक स्कूल के अभिभावकों में इस बात के प्रति रोष है कि उनके बच्चों को स्कूल द्वारा फीस ना भरने पर पढ़ाई से वंचित किया जा रहा है। कोरोना महामारी के दौर में वर्चुअल क्लासेज लगाई जा रही हैं। लेकिन अजंता पब्लिक स्कूल ना केवल सुप्रीम कोर्ट बल्कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम की भी धज्जियां उड़ाकर बच्चों को शिक्षा से वंचित कर रहा है। अजंता पब्लिक स्कूल पेरैंट्स एसोसिएशन की ओर से स्कूल को ई-मेल भेजकर यह कहा गया कि वे सब स्कूल द्वारा निर्धारित फीस भरने में समर्थ हैं। पूरी फीस लेने की बजाय स्कूल सिर्फ ट्यूशन फीस ही ले। लेकिन स्कूल पर इसका कोई असर नहीं है।
पेरैंट्स का कहना है कि स्कूल प्रबंधन अभिभावकों को व्यक्तिगत संपर्क करके इस बात का दबाव बना रहा है कि वे स्कूल को ई-मेल करें कि उनका पैरेंट्स एसोसिएशन से कोई लेना-देना नहीं है। वे फीस भरकर बच्चों को पढ़ाना चाहते हैं। हालांकि दबाव में कुछ अभिभावकों ने ऐसा किया भी है। बाकी बहुत से अभिभावकों को यह कहा जा रहा है कि अगर वे फीस नहीं भर सकते तो बच्चों के टीसी ले जा सकते हैं। अभिभावकों का कहना है कि यह सरासर ज्यादती है। कोरोना महामारी में जहां देश में लोग इतना अधिक धर्म-कर्म कर रहे हैं, इसी दौर में निजी स्कूलों द्वारा मचाई जा रही लूट पर सरकार को शिकंजा कसना चाहिए। सरकार को चाहिए कि हर स्कूल का डाटा ऑनलाइन करे कि वह किसी अभिभावक से कितना पैसा वसूल रही है।