चंडीगढ़। कांग्रेस के राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कर्मचारियों के महंगाई भत्ते पर रोक लगाने के फैसले को तुगलकी फरमान बताते हुए भाजपा-जजपा सरकार को कर्मचारी विरोधी संघ करार दिया। सरकार ने महंगाई भत्ता काटकर कर्मचारियों व पेंशनरों को 3600 करोड़ का चूना लगाने का काम किया है।
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कोरोना महामारी में हर वर्ग पिस रहा है। सरकार की ओर से 28 फरवरी 2020 को करीब 4 महीने पहले 1,42,343 करोड़ का बजट पारित किया था। पेश किए गए बजट में 1,19,751 करोड़ का सरकारी खर्च का लेखा-जोखा भी दिखाया गया है। फिर बजट पेश करने के 100 दिन के अंदर ही कर्मचारियों व पेंशनर्स के महंगाई भत्ते पर कैंची चला दी है।
पत्रकारों से बातचीत करते हुए सुरजेवाला ने कहा कि प्रदेश में 3 लाख सरकारी कर्मचारी हैं व 1,29,000 पेंशनर्स। 6 जुलाई 2020 को आदेश पारित कर खट्टर सरकार ने जनवरी 2020 जुलाई 2020 व जनवरी 2021 की महंगाई भत्ते की किश्तें पूर्णतया काट दी हैं। 2020-21 के बजट में कर्मचारियों की तनख्वाह व पेंशन के लिए 36,012 करोड़ का प्रावधान किया गया है। महंगाई भत्ते की जनवरी 2020 की 4 प्रतिशत की किस्त, जुलाई 2020 की 4 प्रतिशत की किस्त व जनवरी 2021 की 4 प्रतिशत की किस्त भी लगाएं, तो कर्मचारियों की जेब से 3,600 करोड़ रुपये काटने का इंतजाम कर लिया गया है।
सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि एक तरफ तो खट्टर सरकार मंत्रियों के भत्ते बढ़ा रही है, मंत्रियों व अधिकारियों के लिए नई कारें खरीद रही है, मुख्यमंत्री व मंत्रियों की डिस्क्रीशनरी ग्रांट की एक फूटी कौड़ी को भी कम नहीं किया गया, मुख्यमंत्री-उपमुख्यमंत्री-मंत्री या विधायकों को मिलने वाले महंगाई भत्ते में एक पैसे की कटौती नहीं की गई, सरकार की फिजूलखर्ची लगातार जारी है, तो दूसरी ओर कोरोना व आर्थिक मंदी की मार सह रहे हरियाणा के कर्मचारियों व पेंशनरों का महंगाई भत्ता काटकर उन्हें मार मारी जा रही है।