चंडीगढ़। हरियाणा में इस बार फिर से पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव तय समय से देरी से होंगे। कोरोना के चलते सरकार अभी तक चुनाव की तैयारियां भी शुरू नहीं कर सकी है। जिसके चलते इस बार पंचायती चुनाव अक्तूबर माह तक होने की संभावना है।
हरियाणा में पिछली बार ग्राम पंचायत, पंचायत समीतियों तथा जिला परिषदों के चुनाव वर्ष 2015 में हुए थे।
पिछले चुनाव के दौरान मनोहर सरकार ने पंचायत प्रतिनिधियों के लिए शैक्षणिक योग्यता निर्धारित की थी। जिसके चलते कुछ जनप्रतिनिधियों ने इस मामले को अदालत में चुनौती दे डाली। इसके बावजूद सरकार सुप्रीम कोर्ट में भी जीत गई। इस जद्दोजहद के बीच चुनाव छह माह देरी से हुए थे। मौजूदा पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल 25 जुलाई को समाप्त होने जा रहा है।
कोरोना के चलते मार्च माह से हरियाणा में सरकारी दफ्तरों का कामकाज लगभग बंद है। अभी तक दफ्तरों में पब्लिक डीलिंग शुरू नहीं हो सकी है। जिसके चलते सरकार अभी तक चुनाव की तैयारियां भी शुरू नहीं कर सकी है। विभागीय सूत्रों की मानें तो अगले माह पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल पूरा होने के बाद सरकार ने प्रशासक लगाने का मन बना लिया है।
किसी भी चुनाव से पहले न केवल नए सिरे से वार्ड बंदी होती है बल्कि कई नए वार्ड भी बनाए जाते हैं। हरियाणा में पिछले पांच साल के दौरान नए जिलों का निर्माण भी हो चुका है। जिसके चलते कुछ पुरानी पंचायतों को समाप्त किया जाएगा और नई पंचायतों का गठन किया जाएगा। इसके अलावा चुनाव से पहले ग्रामीण क्षेत्रों की वोटर सूचियों में संशोधन व अंतिम प्रकाशन भी अनिवार्य है। कोरोना के चलते हरियाणा सरकार अभी तक ऐसी किसी भी प्रक्रिया को शुरू नहीं कर पाई है। जिसके चलते यह माना जा रहा है कि सरकार जुलाई माह से चुनाव प्रक्रिया शुरू करेगी और अक्तूबर में ग्राम पंचायतों, पंचायत समीतियों तथा जिला परिषदों के चुनाव होंगे।