चंडीगढ़। हरियाणा हो या देश का कोई भी राज्य अब समय आ गया जब बेटियों को उच्च शिक्षा प्रदान करने की राह में आने वाली बाधाओं को मिलकर दूर करना होगा। इसके लिए न केवल सरकारों को अपनी नीतियां सरल बनानी होगी बल्कि अभिभावकों को भी अपनी पारंपरिक सोच को त्यागकर बेटियों को आत्मनिर्भर बनाना होगा। यह बात शुक्रवार को सेल्फी विद डॉटर फांउडेशन द्वारा बेटियों के अधिकारों के लिए आयोजित वेबीनार में शामिल हुए शिक्षाविदें, बुद्धिजीवियों ने व्यक्त किए। वेबिनार में देश के सात राज्यों से वह अभिभावक अपनी बेटियों के साथ जुड़े, जिनकी एक, दो या तीन बेटियां हैं। वेबिनार में बेटियों के जन्म लेने की स्थिति में पारिवारिक व सामाजिक दबाव के तमाम पहलुओं पर खुलकर चर्चा हुई। आखिर में इस बात पर सहमति बनी कि बेटियों के लिए विवाह के दौरान होने वाले खर्च यानी दान-दहेज को इक_ा करने से ज्यादा जरूरी उनके लिए उच्च स्तरीय पढ़ाई के खर्च का बंदोबस्त करने की है।
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वेबिनार में बाल विवाह पर भी चर्चा करते हुए इसका कड़ा विरोध किया गया। देश में 27 फीसदी लड़कियां बाल विवाह का शिकार होती हैं। हरियाणा के कुछ इलाकों में आज भी बाल विवाह हो रहे हैं, जिन्हें रोकने के लिए सामाजिक सोच में बदलाव की जरूरत है। वक्ताओं ने बेटियों के जन्म पर खुशियां मनाने की वकालत करते हुए कहा कि यदि किसी के यहां लगातार दो या तीन या चार बेटियां जन्म लेती हैं और बेटे के लिए उन पर पारिवारिक दबाव बनाया जाता है तो उसके प्रतिवाद या विरोध की शुरुआत खुद से करनी होगी।
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वेबिनार में एक के बाद एक ऐसे कई उदाहरण दिए गए, जिसमें कहा गया कि लड़कियां अपने माता-पिता के प्रति लडक़ों से कहीं ज्यादा केयरिंग (देखभाल करने वाली) साबित होती हैं। फिल्म निर्माता अतर सिंह सैनी ने कहा कि पश्चिमी देशों खासकर मुंबई में लडक़ा और लडक़ी में कोई भेद नहीं किया जाता। सेल्फी विद डाटर कंपेन एंड फाउंडेशन के संयोजक सुनील जागलान ने बदलाव की शुरुआत पहले घर, फिर परिवार, उसके बाद पड़ोस और बाद में समाज से करने की बात कहते हुए इसे जनांदोलन बनाने के लिए प्रेरित किया। वेबीनार में सेल्फी विद डाटर फाउंडेशन की सिग्नेचर कंपेन की ब्रांड अंबेसडर अनवी अग्रवाल, सेल्फी विद डाटर अभियान ब्रांड अंबेसडर रिजवाना, अंजुम इस्लाम, शहनाज बानो, आरस्तुन खान, वसीमा तथा पूजा सिंह, सीमा तंवर, कृष्णा वानखेड़े, मुकेश कुमार, सुरेंद्र कुमार, भिवानी के रतन, सुनील सैनी, जितेंद्र सिंह, आरपीएफ के जवान संजय और गुरुग्राम के सतेंद्र राघव ने भी बेटियों की उच्च शिक्षा को प्रोत्साहित करने की जरूरत पर जोर दिया।