चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने जहां नए जेई को ज्वाइनिंग देनी शुरू कर दी है, वहीं कोरोना काल में काम कर रहे अस्थाई जेई को घर का रास्ता दिखा दिया गया है। यह ऐसा समय है, जब न केवल प्रदेश बल्कि पूरे देश में नई नौकरियों की दिक्कत पैदा हो रही है। ऐसे में निकाले गए जूनियर इंजीनियर सरकार से सवाल पूछ रहे हैैं कि आखिर अब वह कहां जाएं।
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सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा ने स्वास्थ्य विभाग में तैनात एनएचएम कर्मचारियों के साथ भी सौतेला व्यवहार करने और उनकी मांगों के प्रति घोर उदासीनता बरतने का आरोप लगाया है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष लांबा व महासचिव सतीश सेठी ने बताया कि मुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री को पत्र ट्विट कर कोविड 19 में फ्रंटलाइन में रहकर जंग लड़ रहे एनएचएम में लगे डाक्टरों, नर्सो व एएनएम सहित अन्य पदों पर लगे कर्मचारियों के साथ किए जा रहे भेदभाव को दूर करने और अन्य मांगों को समाधान करने की मांग की है।
सुभाष लांबा ने कहा कि ऐसे ही शहरी निकाय विभाग में जूनियर इंजीनियरों ने कोरोना वारियर्स बनकर काम किया। अब उनसे काम निकल गया तो उन्हें दर दर भटकने के लिए मजबूर कर दिया गया है। ऐसे जेई की संख्या एक हजार के आसपास है, जबकि यह भी सही है कि सरकार ने करीब दो हजार नए जेई को ड्यूटी ज्वाइन कराई है।
सुभाष लांबा के अनुसार मनोहर लाल सरकार ने अपने पिछले कार्यकाल में विभिन्न कर्मचारी संगठनों द्वारा की गई हड़ताल पीरियड को रेगुलराइज कर काटे गए वेतन का भुगतान कर दिया है। लेकिन एनएचएम की अभी तक 35 दिन के हड़ताल पीरियड का कटौती किया गया वेतन नहीं दिया है। बरसों से हजारों कर्मचारी ट्रांसफर की मांग कर रहे हैं, लेकिन प्रतिनियुक्तियों को स्थाई ट्रांसफर नहीं किया जा रहा है।