लंबे समय से निजी स्कूलों की मनमानी झेल रहे हरियाणा के सरकारी स्कूलों के लिए कोरोना काल में अच्छी खबर आई है। प्रदेश के करीब दो लाख बच्चों ने सरकारी स्कूलों की तरफ रूख कर लिया है। इन बच्चों का प्राइवेट स्कूलों से मोह भंग हो चुका है। ऐसे में मौके का फायदा उठाते हुए हरियाणा सरकार ने भी इन स्कूलों में आने वाले विद्यार्थियों के लिए नियमों में कई तरह की छूट प्रदान की है।
हरियाणा में सरकारी स्कूल लंबे समय से हाशिए पर चल रहे हैं। इन स्कूलों में सामान्य श्रेणी के बच्चों के मुकाबले दलित व पिछड़ा वर्ग के बच्चे अधिक आते रहे हैं। प्रदेश में मध्यमवर्गीय तथा उच्च स्तरीय परिवारों के बच्चे पूरी तरह से निजी व मॉडल स्कूलों की तरफ मुड़ चुके हैं। पिछले कई वर्षों से तो हरियाणा के सरकारी स्कूलों की हालत यह है कि इनमें ईंट-भटे पर काम करने वाली लेबर के बच्चों को दाखिल करके कागजी कार्रवाई पूरी की जा रही है।
अब कोरोना के चलते मार्च माह से हुए लॉकडाउन के कारण निजी स्कूलों की मनमानी से अभिभावक इतने परेशान हुए कि उन्होंने अपने बच्चों को निजी स्कूलों से निकालना शुरू कर दिया।
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सरकार के आदेशों के चलते निजी स्कूल संचालक भले ही टयूशन फीस ले रहे हैं लेकिन अधिकतर स्कूलों ने टयूशन फीस को बढ़ाकर उसमें अन्य सभी तरह के फंडों को कवर कर लिया। कई स्कूल संचालकों द्वारा बच्चों को एसएलसी आदि भी नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में करीब दो लाख स्कूली बच्चे निजी स्कूलों को छोडक़र सरकारी स्कूलों की तरफ आ गए हैं। हरियाणा स्कूल लैक्चरर एसोसिएशन (हसला) के प्रदेशाध्यक्ष दयानंद दलाल ने सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि एसएलसी की अनिवार्यता को समाप्त करके निजी स्कूलों पर नकेल डालने का काम किया है। इस फैसले को सख्ती से लागू करना चाहिए।