चंडीगढ़, पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने प्रदेश सरकार की तरफ से 17 हजार किसान मित्र नियुक्त करने के ऐलान पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को खुद किसानों की मित्र बनना चाहिए। अगर सरकार ही किसानों के विरोधी बन बैठी हो तो फिर किसान मित्र नियुक्त करने का क्या फायदा। सरकार को नई-नई शब्दावली गढऩे की बजाय अपनी किसान विरोधी नीतियों पर मंथन करना चाहिए। तमाम महकमों, मंत्रियों, अधिकारियों और कर्मचारियों को किसानों के मित्र की तरह काम करना चाहिए।
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हुड्डा ने कहा कि अगर सरकार किसानों की हमदर्द मित्र बनना चाहती है तो उसे स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने, फसल के उचित रेट देने, कृषि की लागत कम करने, खेती उपकरणों से टैक्स हटाने,डीजल के रेट कम करने जोकि रोज बढ़ रहे है और कर्ज माफी की दिशा में कदम बढ़ाने चाहिए। किसान को राहत और प्रोत्साहन देने की बजाय सरकार लगातार खेती को महंगी करने ,फसल की खरीद रोकने और किसानों पर बंदिशें थोपने पर लगी है। बीजेपी ने पिछले कार्यकाल में अधिकारियो पर विश्वास ना करके अपने चहेतों को एडजस्ट करने के लिए, प्रदेश से बाहरियों को सुशासन सहयोगी भी नियुक्त किया था। लेकिन पूरी व्यवस्था में ना कहीं उनका सहयोग नजर आया और न ही प्रदेश में कहीं सुशासन देखने को मिला।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि अगर तमाम विफलताओं के बावजूद सरकार किसान मित्र बनाना ही चाहती है तो उसे वालंटियर नियुक्त करने की बजाए एचएयू से कृषि की पढ़ाई करने वाले बेरोजगार युवाओं को नियुक्ति देनी चाहिए। इससे युवाओं को रोजग़ार भी मिलेगा और वो अपनी दक्षता के मुताबिक कृषि क्षेत्र में अपना योगदान भी दे पाएंगे। अपने चहेतों को एडजस्ट करने की बजाए सरकार को इनकी भर्ती के लिए एक स्पष्ट और पारदर्शी प्रक्रिया अपनानी चाहिए।