चंडीगढ़, 12 जून। हरियाणा में कोरोना की चपेट में आकर मरने वालों में ज्यादातर वह लोग शामिल हैं जो पहले से ही किसी ने किसी बीमारी का शिकार थे। कोरोना काल में सरकार द्वारा प्रत्येक जिले में गठित की गई डेथ ऑडिट कमेटी द्वारा अपनी रिपोर्ट भेज दी गई है। जिलों से आई इस रिपोर्ट का राज्य स्तर पर निरीक्षण किया जाएगा। उसके बाद इसे केंद्र को भेजा जाएगा।
हरियाणा में अब तक कोरोना के कारण 64 व्यक्तियों की मौत हो चुकी है। बृृहस्पतिवार को सबसे ज्यादा 12 मौतें हुई हैं। इन मौतों के पीछे का कारण जानने के लिए हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज द्वारा पहले ही जिला स्तर पर डेथ ऑडिट कमेटियों का गठन किया जा चुका है। जिन्होंने गुरुवार को अपनी रिपोर्ट दाखिल कर दी है। कोरोना से मरने वाले में सर्वाधिक ऐसे लोग हैं जिन्हें पहले से ही कैंसर की बीमारी थी। दूसरे नंबर पर ऐसे पॉजिटिव हैं जिन्हें दिल की बीमारी थी। तीसरे नंबर पर वह लोग हैं जिन्हें पहले से ही बीपी, शुगर आदि जैसी बीमारियां थी और वह कोरोना की चपेट में आ गए।
कोरोना से मरने वालों में 90 फीसदी मरीज ऐसे थे जिनका पहले से ही अलग-अलग बीमारियों के चलते अस्पतालों में इलाज चल रहा था। इलाज के दौरान अस्पतालों में आने जाने तथा भर्ती होने की वजह से वह कोरोना संक्रमण का शिकार हो गए और उनकी मृत्यु हो गई है।
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हरियाणा स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजीव अरोड़ा ने हरियाणा में सामुदायिक फैलाव से इनकार करते हुए कहा कि दिल्ली से सटे चार प्रमुख जिलों गुरुग्राम, फरीदाबाद, झज्जर और सोनीपत में सबसे ज्यादा एक्टिव केस हैं। इन चारों जिलों की आबादी करीब 80 लाख के आसपास है, जबकि कोरोना के एक्टिव केस ढाई हजार के आसपास हैं। इसलिए यह किसी सूरत में नहीं कहा जा सकता कि यहां कम्यूनटी स्प्रेड हो चुका है। ट्रैवल हिस्ट्री के कारण केस बढ़ रहे हैं।
राजीव अरोड़ा ने बताया कि हरियाणा में मृत्यु दर अब एक फीसदी हो गई है। 18 मई के बाद यह स्थिति बढ़ी है। रिकवरी रेट पहले 70 फीसदी था, जो अब 38 फीसदी पर आ गया है। मरीज को ठीक होने में दस दिन का समय लगता है। इसलिए जितने मरीज आ रहे हैं, उतने ठीक भी रहे हैं। हरियाणा के पास करीब 33 हजार बेड की उपलब्धता है, जो किसी भी गंभीर स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त है। राजीव अरोड़ा ने माना कि अब बिना लक्षण वाले ज्यादा मरीज सामने आ रहे हैं। उन्हें पहले होम आइसोलेट करने की वय्वस्था की गई है। यदि ऐसा कोई इंतजाम नहीं है तो उन्हें अस्पतालों में आइसोलेेट किया जा रहा है। कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज में लगे डाक्टरों व स्वास्थ्य कर्मियों को इम्युनिटी बूस्ट करने की आयुर्वेदिक दवाएं निरंतर दी जा रही हैं।