चंडीगढ़। हरियाणा के बिजली वितरण निगमों की जिद प्रदेश के हजारों किसानों पर भारी पड़ी। किसानों को जेब भी ढीली करनी पड़ी लेकिन दो साल के इंतजार के बाद भी उन्हें नलकूप कनेक्शन नहीं मिला। गुजरात की जिस कंपनी पर सरकार ने 'भरोसा’ किया जब उसने खुद ही सरेंडर कर दिया तो सरकार ने अपना फैसला बदला। अब किसानों की मर्जी होगी। अगर वे चाहेंगे तो थ्री-स्टार मोटर खरीद कर ही नलकूप कनेक्शन ले सकेंगे। हरियाणा में नलकूप कनैक्शन की आस लगाए बैठे किसानों के लिए बड़ा झटका है।
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दरअसल खट्टर सरकार के पहले कार्यकाल के दौरान राज्य के कई ब्लॉक में नलकूप कनेक्शन पर पाबंदी लगाई गई। इस फैसले का विरोध हुआ तो सरकार ने तय किया कि फाइव स्टार मोटर वाले किसानों को नलकूप कनेक्शन दिए जाएंगे। सरकार ने खुद ही फाइव स्टार मोटर खरीदने का भी निर्णय लिया। हाई पावर परचेज कमेटी की बैठक में गुजरात की एक ही कंपनी को लगभग 29 हजार फाइव स्टार मोटर के आर्डर सरकार ने दिए। बार-बार की चि_ी के बाद कंपनी ने 4868 के करीब मोटर निगमों को भेजी। सरकार का दावा है कि ये मोटर फाइव स्टार हैं। बेशक, कंपनी ने फाइव स्टार मोटर ही दी लेकिन दो वर्षों की अवधि में मोटर की स्टार रेटिंग भी गिर गई है। केंद्र सरकार की एजेंसी-ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (बीईई) ने 2 फरवरी, 2020 को फाइव स्टार वाली मोटरों की रेटिंग थ्री-स्टार कर दी। दरअसल, बीईई हर साल रेटिंग तय करती है। ऐसा इसलिए क्योंकि हर वर्ष नई तकनीक आती
हैं। अब सरकार यही मोटर किसानों को दे रही है। इतना ही नहीं, किसानों को यह छूट भी दे दी है कि वे मार्केट से थ्री-स्टार मोटर खरीद कर नलकूप कनेक्शन ले सकते हैं। जो किसान निगमों से मोटर लेना चाहेंगे, उन्हें भी थ्री-स्टार मोटर ही मिलेगी। किसान चाहेंगे तो ब्याज सहित अपना पैसा भी वापस ले सकेंगे। हालांकि इस बात का जवाब किसी के पास नहीं है कि किसानों के लम्बे इंतजार की वजह से उन्हें हुए नुकसान का जिम्मेदार कौन होगा।
गौरतलब है कि हरियाणा के 82 हजार के करीब किसानों ने ट्यूबवैल कनेक्शन के लिए बिजली निगमों में आवेदन किया। इनमें से 9039 किसान ऐसे हैं, जिन्होंने निगमों द्वारा तय सभी शर्तों को पूरी करते हुए आवेदन शुल्क भी जमा करवा दिया। कई किसानों ने तीन तो बड़ी संख्या में किसानों ने दो साल पहले पैसा जमा करवाया था। इस मामले में बिजली मंत्री चौ.रणजीत सिंह का कहना है कि किसानों को विकल्प दिया गया है कि वे थ्री-स्टार मोटर खरीद सकते हैं। जिन किसानों ने पैसा जमा करवाया हुआ है वे चाहेंगे तो ब्याज सहित उनका पैसा रिफंड होगा। निगमों के पास 4800 के करीब मोटर हैं। पहले उन्हीं किसानों को कनेक्शन मिलेंगे, जो फीस जमा करवा चुके हैं।