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हरियाणा

पंचकूला ग्रीन बेल्ट फेंसिंग मामले में हाईकोर्ट का फैसला ऐतिहासिक, जनता के हितों की होगी रक्षा : सुधा भारद्वाज

Updated on Monday, June 01, 2026 20:54 PM IST

पंचकूला। हरियाणा प्रदेश महिला कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेत्री सुधा भारद्वाज ने पंचकूला की ग्रीन बेल्ट फेंसिंग मामले में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय का स्वागत करते हुए इसे जनहित, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक ऐतिहासिक फैसला बताया है। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय द्वारा ग्रीन बेल्ट की फेंसिंग और अन्य संरचनाओं को बिना उचित प्रक्रिया के हटाने पर रोक लगाने से पंचकूला के हजारों निवासियों को बड़ी राहत मिली है।

 

पंचकूला के निवासियों को बड़ी राहत, बिना नोटिस रेलिंग या संरचनाएं नहीं हटाई जा सकेंगी


सुधा भारद्वाज ने कहा कि किसी भी शहर के पार्क और ग्रीन बेल्ट उसकी सुंदरता, पर्यावरणीय संतुलन और स्वच्छ वायु के महत्वपूर्ण स्रोत होते हैं। इन्हें संरक्षित और विकसित करने की जिम्मेदारी सरकार की होती है, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि वर्तमान सरकार इन अमूल्य धरोहरों के संरक्षण के बजाय उन्हें नुकसान पहुंचाने वाली नीतियों पर चलती दिखाई दे रही है।
उन्होंने कहा कि ग्रीन बेल्टों में लगाए गए पेड़-पौधों को आवारा पशुओं से बचाने के लिए स्थानीय निवासियों ने अपने निजी संसाधनों से रेलिंग, फेंसिंग और हेज लगाकर वर्षों तक उनका संरक्षण किया है। नागरिकों के इस प्रयास ने पंचकूला की सुंदरता को नई पहचान दी है। यदि इन सुरक्षा व्यवस्थाओं को ही हटाया जाएगा तो हरियाली और सौंदर्य दोनों प्रभावित होंगे। ऐसे में उच्च न्यायालय का निर्णय पर्यावरण संरक्षण और जनभावनाओं के अनुरूप है।
सुधा भारद्वाज ने बताया कि माननीय न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि शहर की ग्रीन बेल्टों के रखरखाव और संरक्षण में स्थानीय निवासियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। न्यायालय ने यह भी माना कि नगर निगम और प्रशासन स्वयं सभी ग्रीन बेल्टों का प्रभावी रखरखाव करने तथा आवारा पशुओं की समस्या पर पूर्ण नियंत्रण रखने की स्थिति में नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि न्यायालय ने यह स्पष्ट निर्देश दिया है कि यदि किसी स्थान पर अतिक्रमण पाया जाता है तो प्रशासन को संबंधित व्यक्ति को व्यक्तिगत रूप से स्पष्ट नोटिस देना होगा, उसे अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर प्रदान करना होगा तथा प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करना होगा। बिना नोटिस, बिना सुनवाई और बिना सक्षम आदेश के किसी भी रेलिंग, फेंसिंग अथवा अन्य संरचना को हटाना न्यायोचित नहीं माना जा सकता।
सुधा भारद्वाज ने कहा कि न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि जहां वास्तविक अतिक्रमण है और जिससे यातायात, सार्वजनिक मार्ग या अन्य नागरिक सुविधाएं प्रभावित हो रही हैं, वहां कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है। लेकिन पूरे क्षेत्र में एक समान कार्रवाई करते हुए बिना जांच और प्रक्रिया के संरचनाओं को हटाना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि अब सरकार और प्रशासन का दायित्व है कि न्यायालय के निर्देशों का पूर्ण सम्मान करते हुए इस विषय पर स्पष्ट, पारदर्शी और समान नीति तैयार करें, जिससे ग्रीन बेल्टों का संरक्षण सुनिश्चित हो, शहर की सुंदरता बनी रहे तथा आवारा पशुओं की समस्या का प्रभावी समाधान हो सके। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि कोई व्यक्ति ग्रीन बेल्ट के नाम पर सार्वजनिक भूमि पर स्थायी कब्जा न कर सके।
सुधा भारद्वाज ने कहा कि यह फैसला कानून के शासन, प्राकृतिक न्याय और नागरिक अधिकारों की रक्षा का मजबूत उदाहरण है। साथ ही यह प्रशासन को भी स्पष्ट संदेश देता है कि किसी भी कार्रवाई को कानूनी प्रक्रिया, पारदर्शिता और नागरिकों के अधिकारों का सम्मान करते हुए ही किया जाना चाहिए।

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