हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने विपक्षी राजनीति दलों द्वारा मेरा पानी-मेरी विरासत योजना को लेकर किए जा रहे प्रचार पर पलटवार करते हुए कहा है कि हरियाणा सरकार की इस योजना को किसानों ने स्वीकार कर लिया है। जिसके चलते अभी तक प्रदेश के 53 हजार किसानों ने धान की पैदावार छोडक़र फसल विविधिकरण को अपनाने का फैसला किया है। हरियाणा सरकार ने इस साल एक लाख हैक्टेयर जमीन से धान की पैदावार को बंद करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। जिसमें से अब तक 58 हजार 421 हैक्टेयर भूमि को कवर किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि हरियाणा के पास अगले चार साल तक के लिए धान का स्टॉक उपलब्ध है और इसलिए किसानों को धान की खेती छोडक़र अन्य फसलों को अपनाना होगा।
बुधवार को चंडीगढ़ में पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि इस साल गेहूं की करीब 78 लाख मीट्रिक टन खरीद हुई है। ऐसे में गेहूं का भी दो साल तक का स्टॉक उपलब्ध है। सीएम ने बताया कि करनाल जिला के गांव सिरसी से लाल डोरा मुक्ति के लिए शुरू किए गए अभियान के तहत अब तक 75 गावों में जमीन रिकार्ड का डिजटलाइजेशन किया जा चुका है।
(SUBHEAD)
जिसके तहत 44 लाख 21 हजार 200 हैक्टेयर जमीन को कवर किया जा चुका है। मेरी फसल-मेरा ब्यौरा योजना में बदलाव करने के संकेत देते हुए सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अब तक 12 लाख किसानों द्वारा अपना पंजीकरण करवाकर 812 करोड़ रुपए का प्रीमियम दिया जा चुका है जबकि इसकी एवज में सरकार द्वारा 2632 करोड़ रुपए का मुआवजा आबंटित किया जा चुका है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत हरियाणा के किसानों के खाते में अब तक 1392 करोड़ रुपए दिए जा चुके हैं। आने वाले दिनों में इस योजना का भी विस्तार किया जा रहा है ताकि अधिक से अधिक किसानों को इसका लाभ मिल सके।