कोरोना पॉजिटिव के संपर्क वालों के सेंपल लेने में बरत रहे लापरवाही
गुरुग्राम। जिला के स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना को लेकर शुरुआत में जो सक्रियता दिखाई थी, अब वह नजर नहीं आ रही। शुरुआत में जितने की कोरोना पॉजिटिव केस सामने आए, उनकी ट्रेवल हिस्ट्री, वे किस-किस से मिले और कहां-कहां पर गए, यह सब जांच-पड़ताल करके संबंधित व्यक्तियों को भी क्वारंटाइन किया जाता था। अब ऐसा कुछ नहीं हो रहा है। आरोप हैं कि अब तो कोरोना पॉजिटिव व्यक्ति के परिजनों के भी सेंपल लेने में दिलचस्पी विभाग की नहीं रही।
नागरिक अस्पताल में ओपीडी में ज्यादातर ऐसे ही लोग आ रहे हैं, जिन्हें बुखार, खांसी आदि लक्षण हैं। इनमें से काफी को कोरोना पॉजिटिव जांच के लिए चयनित किया जाता है। जिन लोगों की कोरोना जांच पॉजिटिव आ जाती है, उसके बाद उनके परिवारों के सदस्यों की जांच के लिए अब यहां कोई व्यवस्था नहीं है। सवाल यह उठता है कि वह व्यक्ति कोरोना आने से पूर्व अपने परिवार के साथ रहता था। जब उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है तो फिर परिवार के सेंपल भी लिए जाने चाहिए। मगर ऐसा नहीं हो रहा। ऐसा आरोप भी लग रहे हैं और खुद यहां के स्टाफ भी दबी जुबान में इस बात को कह रहे हैं। नाम न छापने की शर्त पर यहां दो डॉक्टर्स ने बताया कि लोग इसी बात को लेकर उनके साथ झगड़ते भी हैं। वे कहते हैं कि उनके घरवालों की भी जांच की जाए। मगर इस तरह की जांच के लिए अधिकारिक रूप से तो नियम है, लेकिन यहां उच्च अधिकारी इससे इंकार कर देते हैं। अधिकारी मौखिक तौर पर कह देते हैं कि जिनमें लक्षण नहीं हैं उनके सेंपल लेने की कोई जरूरत नहीं।
जब शोर मचाना शुरू किया तब लिए सेंपल
शनिवार को यहां पर एक व्यक्ति की कोरोना जांच कराने पहुंचा। उसके साथ दो युवक भी थे। उसी जांच के बाद उन युवकों ने भी कहा कि उनके भी सेंपल लिए जाएं। इस पर मना कर दिया गया कि उनके सेंपल की जरूरत नहीं है। उन्होंने अस्पताल के एक अधिकारी से संपर्क किया। उनके साथ युवकों की कहासुनी भी हुई। इसके बाद अधिकारी ने अपने अधीनस्थ डॉक्टर्स को उनके सेंपल लेने को कहा।
इस बारे में गुरुग्राम के सिविल सर्जन डा. जेएस पूनिया का कहना है कि कोविड 19 के सभी नियमों को फॉलो किया जा रहा है। ऐसी कोई बात नहीं है। अगर किसी के साथ ऐसा हुआ है तो उनके संज्ञान में लाया जाए। वे उस पर कार्रवाई करेंगे।