20 मई 2026, रोहतक। दादा लख्मी चंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स (डीएलसीसुपवा) के पूर्व छात्र द्वारा बनाई गई शॉर्ट फिल्म ‘धारा का टेम’ (टाइम फॉर मिल्किंग) को एनएफडीसी (नेशनल फिल्म डिवलेपमेंट कॉरपोरेशन) से सराहना मिल रही है। एनएफडीसी ने इस फिल्म को 19वें मुंबई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (एमआईएफएफ) की प्रचार सामग्री में शामिल किया है। इसके बारे में अपने सोशल मीडिया हैंडल्स पर पोस्ट करते हुए क्षेत्रीय भाषाओं के फिल्म निर्माताओं को फेस्टिवल में शिरकत करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
- 19वें एमआईएफएफ की प्रचार सामग्री में किया शामिल
- सुपवा के एपी ने किया था साउंड डिजाइन, मिल चुका अवार्ड
‘धारा का टेम’ का निर्देशन डीएलसीसुपवा के 2012 बैच में डायरेक्शन के छात्र रहे अमित कुमार ने किया है, जबकि इसका साउंड डिजाइन यूनिवर्सिटी के ऑडियोग्राफी डिपार्टमेंट के असिस्टेंट प्रोफेसर अभिजीत सरकार ने किया है। अभिजीत बताते हैं कि 30 मिनट की इस शॉर्ट फिल्म के लिए साल 2024 में 18वें मुंबई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (एमआईएफएफ) में बेस्ट साउंड डिजाइनर का उन्हें अवार्ड मिल चुका है। एमआईएफएफ का आयोजन केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय व एनएफडीसी कराते हैं। राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के बाद एमआईएफएफ को देश का दूसरा सबसे बड़ा फिल्मी अवार्ड माना जाता है।
सुपवा की फिल्म एवं टेलीविजन फैकेल्टी के एफसी महेश टीपी बताते हैं कि यूनिवर्सिटी यहां पढ़ने वाले छात्रों को ही हुनरमंद नहीं बनाती, बल्कि यहां मौजूद फैकेल्टी सदस्यों को भी अपनी प्रतिभा दिखाने के पूरे अवसर प्रदान करती है। सुपवा से शिक्षा ग्रहण करने के बाद कितने ही छात्र आज फिल्म इंडस्ट्री में अपनी प्रतिभा से सभी को परिचित करवा रहे हैं। यहां के स्टाफ द्वारा साउंड डिजाइन की गई फिल्म को एमआईएफएफ से अवार्ड मिलने से साबित होता है कि यहां गुणवत्तापूरक शिक्षा देने के तमाम इंतजाम प्रदेश सरकार और यूनिवर्सिटी के कुलगुरु डॉ अमित आर्य द्वारा किए जा रहे हैं।
असिस्टेंट प्रोफेसर अभिजीत सरकार बताते हैं कि शॉर्ट फिल्म के नाम ‘धारा का टेम’ से साफ है कि यह हरियाणवी बैकग्राउंड पर बनाई गई है। इसमें हर रोज सुबह के समय पशुओं का दूध निकालने के दौरान किस तरह का मौहाल, वातावरण होता है, वह सभी फिल्माया गया है। बाकायदा पक्षियों की चहचहाट से लेकर वे तमाम चीजें दिखाने का प्रयास किया गया है, जो किसी भी साधारण गांव के किसी घर में बंधे पशुओं के आसपास का अक्सर सीन बना रहता है। बाकायदा पशुओं को बांधने वाली बेल की आवाज, अचानक से तेज सांस छोड़ने की आवाज, दूध निकालने के लिए किसान परिवार द्वारा की जाने वाली तैयारी, आदि को समायोजित किया गया है। अब एनएफडीसी ‘धारा का टेम’ की खासियत और इसे मिले अवार्ड का अपने विभिन्न सोशल मीडिया हैंडल्स पर जिक्र करते हुए क्षेत्रीय भाषाओं के फिल्मकारों को 19वें एमआईएफएफ में भाग लेने को आमंत्रित कर रही है।