चंडीगढ़। हरियाणा के गांवों में रहने वाले लगभग चालीस हजार परिवारों को 'कैडल शैड्सÓ सुविधा उपलब्ध होगी। पशुओं को बांधने के लिए पक्के और स्थाई शैड का प्रबंध राज्य सरकार द्वारा करवाया जाएगा। दरअसल, लॉकडाउन की वजह से बिगड़ी अर्थव्यवस्था और मजदूरों के सामने पैदा हुए रोजगार के संकट को देखते हुए यह योजना बनाई है। मोदी सरकार ने 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज का ऐलान किया है।
प्रदेश के ग्रामीण विकास विभाग ने मनरेगा के तहत गांवों में विकास के लिए विशेष योजना बनाई है। इसी के तहत गांवों में रहने वाले अनुसूचित जाति व पिछड़ा वर्ग के अलावा बीपीएल व दिव्यांग परिवारों को इसका लाभ मिलेगा। वे छोटे किसानों को भी योजना में कवर होंगे जिनके पास कृषि योग्य भूमि है ही नहीं या फिर बहुत कम है। योजना शुरू करने के पीछे दोहरा मकसद है। पहला आर्थिक मदद और दूसरा स्थायी रोजगार का प्रबंध।
प्रदेशभर में 6800 के करीब गांव हैं। उन गांवों में अधिक कैटल शैड बनेंगे, जहां के मजदूर एक्टिव हैं और मनरेगा के तहत अधिक काम हुए हैं। गांवों में 40 हजार के लगभग गरीब परिवारों के लिए ये शैड बनेंगे। शैड के लिए जमीन का प्रबंध संबंधित परिवार को ही करना होगा। ग्राम सभा द्वारा इसके लिए बाकायदा प्रस्ताव पास करना होगा। एक शैड पर करीब 60 हजार रुपये की लागत आएगी। इस योजना पर सरकार ने करीब 240 करोड़ रुपये खर्चने का टारगेट रखा है।
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सरकार ने एक शैड के निर्माण में अधिकतम 21 दिन की समय सीमा तय की है। जिस परिवार के लिए शैड की मंजूरी मिलेगी, उसे कुल लागत में से 309 रुपये के हिसाब से 21 दिन की दिहाड़ी परिवार के मुखिया को दी जाएगी। 6489 रुपये की यह राशि इसीलिए दिया जाएगा ताकि वह अपने हिसाब से शैड का निर्माण कर सके। इसके पीछे मुख्य मकसद मनरेगा मजदूरों को काम मुहैया करवाना है। अकेले शैड से एक परिवार को 21 दिन की मजूदरी मिलेगी।कैटल शैड के निर्माण में इस्तेमाल होने वाली ईंट, सीमेंट, लोहे की राड व चद्द आदि के लिए जिला उपायुक्तों के स्तर पर वेंडर तय किए जाएंगे। जिन एससी, बीपीएल व गरीब किसान परिवारों के यहां शैड बनने हैं वे संबंधित वेंडर से यह सामान ले सकेंगे। पैसों का भुगतान संबंधित ग्राम पंचायत करेगी।
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लॉकडाउन से प्रभावित परिवार जुड़ेगे मुख्यधारा में-
ग्रामीण विकास विभाग के निदेशक हरदीप सिंह का कहना है कि कैटल शैड में चार पशुओं के बांधने का प्रबंध होगा। यानी ये परिवार अगर चाहेंगे तो इतने पशुओं के साथ दूध बेचने का काम करके अपना परिवार पाल सकते हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि गाय, भैंस के लिए ही नहीं भेड़, बकरी के लिए भी इस तरह के शैड बन सकेंगे। उन्होंने कहा कि मकसद यही है कि लॉकडाउन की वजह से प्रभावित हुए गरीब परिवारों को फिर से मुख्यधारा में जोड़ा जा सके।