गुरुग्राम। गुडग़ांव प्रोगे्रेसिव स्कूल्स काउंसिल 24 (जीपीएससी) का वार्षिक सम्मेलन सीबीएसई सहोदय के तत्वावधान में यहां एक होटल में भव्यता से आयोजित किया गया। इसका विषय-चैतन्य-जागरण। जागो, कार्य करो, बदलो: क्रियाशील सचेत शिक्षा रहा। इसका मुख्य उद्देश्य चेतना, उद्देश्यपूर्ण शिक्षण और समग्र विकास के परिप्रेक्ष्य में शिक्षा की नई परिकल्पना करना था। इसमें सांसद, शिक्षा पद्धति से जुड़े अधिकारियों ने अपने विचार सांझा किए। यह सम्मेलन नवीन विचारों, दूरदर्शी दृष्टिकोण और परिवर्तनकारी संवादों का एक अनूठा संगम सिद्ध हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ एक गरिमामय ऑनर मार्च के साथ हुआ, जिसका नेतृत्व गुडग़ांव प्रोगे्रेसिव स्कूल्स काउंसिल सदस्य स्कूलों के हेड बॉय और हेड गर्ल ने किया। इसके पश्चात प्रतिष्ठित गणमान्य व्यक्तियों द्वारा पारंपरिक दीप प्रज्वलन कर ज्ञान और प्रबोधन का आह्वान किया गया। गुडग़ांव प्रोगे्रेसिव स्कूल्स काउंसिल जीपीएससी की अध्यक्षा अलका सिंह, सनसिटी ग्रुप ऑफ स्कूल्स की निदेशक रूपा चक्रवर्ती ने और अन्य विशिष्ट अतिथियों का हार्दिक अभिनंदन किया गया। स्कूल के गायन-समूह द्वारा-गुडग़ांव सहोदय गीत प्रस्तुत किया। इस अवसर पर जीपीएससी सहोदय ईयर बुक चैतन्य-2 का विमोचन भी किया गया।
-गुडग़ांव प्रोगे्रेसिव स्कूल्स काउंसिल के वार्षिक सम्मेलन में कही यह बात
सम्मेलन के मुख्य अतिथि के रूप में राज्यसभा सांसद कार्तिकेय शर्मा ने अपने संबोधन में इस बात पर बल दिया कि वास्तविक पढ़ाई केवल कक्षाओं की चारदीवारी तक सीमित नहीं है। उन्होंने भारत की समृद्ध दार्शनिक विरासत का उल्लेख करते हुए अंतश्चक्षु (आंतरिक दृष्टि) और अपनी अंतरात्मा से जुडऩे के महत्व को समझाया। उन्होंने रटंत प्रणाली के स्थान पर मूल्य-आधारित और बहु-विषयक शिक्षा की वकालत की तथा अपनी वैश्विक क्विज पहल हू कम्स फस्र्ट से परिचय कराया।
जीपीएससी की अध्यक्षा अलका सिंह ने अपने संबोधन में चैतन्य अर्थात शिक्षा के क्षेत्र में चेतना के जागरण के मूल दर्शन को रेखांकित किया। उन्होंने पिछले वर्ष की महत्वपूर्ण उपलब्धियों जैसे कौशल बोध (व्यावसायिक शिक्षा), डिजी कवच (डिजिटल सुरक्षा), दुबई में आयोजित पहला अंतर्राष्ट्रीय सहोदय सम्मेलन गुरुग्राम मैराथन में सक्रिय भागीदारी का उल्लेख किया।
विशेषज्ञ सत्र और तकनीकी विमर्श में सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज ने मूल्यांकन से उत्थान की ओर सत्र में मूल्यांकन प्रक्रियाओं में दक्षता और पारदर्शिता लाने के लिए ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली की सराहना की। डॉ. अमीता मुल्ला वट्टल ने सचेत शिक्षा के दर्शन पर चर्चा करते हुए यांत्रिक शिक्षण से ऊपर उठने की आवश्यकता बताई। उन्होंने समग्र विकास के लिएपंचकोश (अन्नमय, प्राणमय, मनोमय, विज्ञानमय और आनंदमय) के महत्व को समझाया। सीबीएसई के संयुक्त निदेशक नीति शंकर शर्मा ने छात्र कल्याण के लिए सीबीएसई की पहलों जैसे मानसिक स्वास्थ्य जागरुकता, सीबीएसई मेट प्रोग्राम और टेली मानेस सेवाओं के साथ एकीकरण पर प्रकाश डाला। एआई के युग में भावनात्मक बुद्धिमत्ता और चेतना विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में तकनीकी प्रगति और मानवीय संवेदनाओं के बीच संतुलन बनाने पर जोर दिया गया।
आईपीएस देवेश महाला ने भविष्य के नेतृत्व के लिए शारीरिक और मानसिक कल्याण, संतुलित खान-पान और स्वाध्याय को आवश्यक स्तंभ बताया। स्वामी शांततमानंद महाराज और रूपा चक्रवर्ती के बीच हुए संवाद ने नेतृत्व और आध्यात्मिक ज्ञान के अद्भुत मिलन को प्रस्तुत किया। द्वितीय एवं तृतीय सत्र में मोक्ष यादव ने प्राना फ्रेमवर्क और सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव पर बल दिया। मोहित अग्रवाल ने उच्च शिक्षा में एआई के उपयोग और संस्थागत गठजोड़ की भूमिका स्पष्ट की। कैप्टन अभिमन्यु सिंह सिंध ुने तत्वमसि के सिद्धांत के माध्यम से आत्म-ज्ञान की प्राप्ति में शिक्षक की भूमिका को सर्वोपरि बताया। साइबर विशेषज्ञ अभिषेक कुमार और डॉ. गौरव कपूर ने डिजिटल युग में डेटा सुरक्षा, निजता और माइंड फुलनेस को छात्रों के लिए अनिवार्य बताया। सीबीएसई के निदेशक डॉ. बिस्वजीत साहा ने कौशल से कुशल बोध के माध्यम से व्यावसायिक शिक्षा को स्कूली पाठ्यक्रम का अभिन्न अंग बनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में जिला शिक्षा अधिकारी कैप्टन इंदु बोकेन ने भगवान श्री राम के आदर्शों का उदाहरण देते हुए संस्कारों और सांस्कृतिक मूल्यों की महत्ता बताई। डॉ. तुलिका तलवार और सोना गोम्बर ने वैज्ञानिक पालन-पोषण के सूत्र सांझा किए। सभी प्रतिभागियों ने इस संकल्प को दोहराया कि समावेशी नेतृत्व और सामूहिक प्रयास से शिक्षा सीमाओं को पार कर एक ऐसी पीढ़ी तैयार कर सकती है, जो भविष्य के लिए तैयार, भावनात्मक रूप से सशक्त और नैतिक रूप से सुदृढ़ हो।