चंडीगढ़, 1 अप्रैल 2026 आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सुशील गुप्ता ने हरियाणा के विभिन्न जिलों जैसे हिसार, सिरसा, फतेहाबाद, रेवाड़ी, भिवानी, चरखी दादरी और महेंद्रगढ़ में हुई बेमौसम बारिश और भारी ओलावृष्टि से फसलों को हुए भारी नुकसान पर किसानों के प्रति गहरी चिंता व्यक्त की है। डॉ. गुप्ता ने सीधे तौर पर सैनी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा सरकार की किसान विरोधी नीतियों और लगातार हो रही किसानों की अनदेखी के कारण आज हरियाणा का अन्नदाता बेहाल है।
सरकार की कथनी और करनी में जमीन-आसमान का अंतर है।
सैनी सरकार की लापरवाही ने किसानों को सड़क पर ला खड़ा किया, केवल कागजों में सिमट कर रह गई 'मुआवजा' की घोषणाएं: डॉ. सुशील गुप्ता पिछली बारिश-ओलावृष्टि का मुआवजा अभी तक नहीं मिला, और अब हुई बारिश-ओलावृष्टि से किसानों पर मौसम व सरकार की दोहरी मार: डॉ. सुशील गुप्ता भाजपा सरकार किसानों को पोर्टल के चक्कर में न डाले और तत्काल 'विशेष गिरदावरी' कर 50,000 रुपये प्रति एकड़ मुआवजा दे: सुशील गुप्ता
डॉ. सुशील गुप्ता ने कहा, हाल ही में हुई बेमौसमी बारिश व ओलावृष्टि से प्रदेश के कई जिलों के सैकड़ों से ज्यादा गांवों में गेहूं और सरसों की फसल ओलावृष्टि से तबाह हो गई है। मुख्यमंत्री नायब सैनी जी कह रहे हैं कि सरकार भरपाई करेगी, लेकिन सच तो यह है कि किसानों को पिछली बार हुई बारिश और ओलावृष्टि का मुआवजा आज तक नहीं मिला है। यह सरकार केवल वादे करना जानती है, उन्हें निभाना नहीं।" डॉ. गुप्ता ने सैनी सरकार पर तीखा कटाक्ष करते हुए कहा कि भाजपा सरकार ने किसानों को 'पोर्टल' के जाल में उलझा कर रख दिया है। किसानों का हित इसी में है कि सरकार पोर्टल और बायोमेट्रिक जैसी अनावश्यक पाबंदियों से उन्हें तत्काल मुक्ति दे, ताकि वे अपनी फसलों को मंडियों में बिना किसी बाधा के बेच सकें।
आज हरियाणा के किसान के लिए खेती से ज्यादा मुश्किल सरकारी प्रक्रिया हो गई है। पहले बुआई के समय पोर्टल पर विवरण देना, फिर खाद के लिए पंजीकरण करना और फसल बेचने के समय फिर से पोर्टल की पेचीदगियों से जूझना—यह अन्नदाता का उत्पीड़न नहीं तो और क्या है? अब रही-सही कसर मंडी प्रवेश पर बायोमेट्रिक अनिवार्य करके पूरी कर दी गई है। अन्नदाता पूरे देश का पेट भरने जैसा पवित्र कार्य करता है, लेकिन अफसोस कि सरकार उन पर शक करती है। इसी अविश्वास के कारण भोले-भाले किसानों को पोर्टल और बायोमेट्रिक जैसी बेतुकी अनिवार्यताओं में उलझाया जा रहा है। गांवों में इंटरनेट की दिक्कत के कारण सरकारी पोर्टल कई-कई सप्ताह तक बंद पड़े रहते हैं जिससे कई बार किसानों की पकी पकाई फसल मण्डी मे बिना बिक्री के पड़ी रहती है और बारिश मे भीग रही होती है।
आम आदमी पार्टी मांग करती है कि किसान को शक की निगाह से देखना बंद कर, इस जटिल तंत्र को समाप्त किया जाए। और हरियाणा की भाजपा सरकार जब किसान की फसल बर्बाद होती है, तो उसे तकनीक और फाइलों का हवाला देकर टरका दिया जाता है। उन्होंने कहा, "2500 पटवारियों से रिपोर्ट मांगने का दावा केवल किसानों को बरगलाने वाली बात साबित हुई है। जमीनी हकीकत यह है कि किसान की तैयार खड़ी फसल (गेहूं और सरसों) काले दाने में तब्दील हो रही है और उसकी मेहनत मिट्टी में मिल गई है।" सुशील गुप्ता ने कहा की 3 & 4 अप्रैल को मौसम बदलाव के कारण बारिश और ओलावृष्टि की संभावना से किसान बेहद चिंतित है और सरकार चुप है। सैनी सरकार की चुप्पी ने किसानों के नींद उड़ा रखी है।