चंडीगढ़ हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने हरियाणा में गेहूं (और सरसों) की सरकारी खरीद प्रक्रिया को लेकर भाजपा सरकार (नायब सैनी सरकार) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इसे 'तुगलकी फरमान' करार दिया और कहा कि नए नियम किसानों को परेशान करने और MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) पर फसल खरीद से बचने की 'नायब साजिश' हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की नई नियमावली अनुसार ,किसान को अपनी फसल अपनी ही ट्रैक्टर-ट्रॉली में लानी होगी। ट्रॉली पर रजिस्ट्रेशन नंबर साफ लिखा होना चाहिए। मंडी गेट पर ट्रॉली और नंबर की फोटो ली जाएगी, जिसे सरकार के 'मेरी फसल, मेरा ब्यौरा' पोर्टल पर अपलोड करना जरूरी होगा। उसके बाद ही गेट पास मिलेगा।
*“ओलावृष्टि से तबाह फसल, जटिल खरीद नियमों ने बढ़ाया किसान का संकट — राव नरेंद्र सिंह*
फसल मंडी लाने का समय सुबह 6 बजे से शाम 8 बजे तक सीमित। उसके बाद गेट पास नहीं मिलेगा। हर पंजीकृत किसान को खुद मंडी जाकर बायोमेट्रिक (अंगूठा) सत्यापन कराना होगा।
उठान (लिफ्टिंग) के लिए मार्केट कमेटी सचिव, खरीद एजेंसी अधिकारी और ट्रांसपोर्टर — तीनों के अलग-अलग हस्ताक्षर जरूरी, ऐसे नियम किस के लिए भारी परेशानी पैदा कर रहे हैं।
ये नियम प्रक्रियागत बाधाएं पैदा करेंगे, जिससे मंडियों में लंबी कतारें लगेंगी, फसल पहुंचने में देरी होगी और उठान रुक जाएगा।
राव नरेंद्र सिंह ने आगे बताया कि कंबाइन हार्वेस्टर से कटाई दिन-रात चलती है, फसल रात में भी मंडी पहुंचती है। समय सीमा से फसल मंडी के बाहर इंतजार करेगी, खर्च बढ़ेगा और फसल खराब/सड़ने का खतरा बढ़ेगा। उन्होंने कहा हर किसान के पास अपनी ट्रॉली नहीं होती; किराए की ट्रॉली पर पोर्टल कैसे काम करेगा? सरकार किराए की ट्रॉली को कमर्शियल यूज की अनुमति भी नहीं देती। खरीद लक्ष्य घटाकर (80 लाख टन से 72 लाख टन) और स्टोरेज क्षमता सीमित रखकर जानबूझकर खरीद कम करने की कोशिश। राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि किसानों की फसल मंडी में सड़ सकती है, उठान नहीं होगी, MSP पर बिक्री मुश्किल होगी, यानी आर्थिक नुकसान।