चंडीगढ़, 25 मार्च। महाराणा प्रताप उद्यान विश्वविद्यालय करनाल का रईया अनुसंधान केंद्र क्षेत्र के साथ साथ प्रदेशभर के बागवानी किसानों के सपनों को साकार करेगा। क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नए आयाम देगा। अनुसंधान केंद्र में आयोजित हवन में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे प्रदेश के पूर्व कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री औमप्रकाश धनखड़ ने केंद्र में प्रगतिशील किसानों को सम्मानित करते हुए यह बात कही। कार्यक्रम में बतौर विशिष्ट अतिथि महाराणा प्रताप उद्यान विश्वविद्यालय के वीसी प्रो सुरेश मल्होत्रा ने शिरकत की।
रईया उद्यान अनुसंधान केंद्र में आयोजित हवन में पहुंचे पूर्व कृषि मंत्री औमप्रकाश धनखड़ मसाले, फल, फूल, सजावटी पौधों जैसी मूल्यवान खेती पर फोकस करें किसान-बोले धनखड़ महाराणा प्रताप उद्यान विश्वविद्यालय के वीसी प्रो सुरेश मल्होत्रा की रही गरिमामय मौजूदगी
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पूर्व कृषि मंत्री ने कहा कि क्षेत्र में बागवानी अनुसंधान केंद्र का शुरू होना सभी के लिए गर्व और गौरव की बात है। अनुसंधान केंद्र में बागवानी वैज्ञानिक अच्छी किस्म की पौध तैयार करेंगे और बागवानी किसानों को उपलब्ध कराएंगे। उन्होंने कहा कि एनसीआर क्षेत्र को हम ताजा फल, सब्जी, फूल उपलब्ध कराने की ताकत रखते हैं। यह सालाना लगभग 40 हजार करोड़ रुपये की मार्केट है। हमारे युवा अपने प्रोडक्ट की ब्रांडिंग करना सीख लें। मार्केट पर हमारा कब्जा होगा। सजावटी पौधों की बड़ी मार्केट उभर रही है। मुनीमपुर में फूल एवं बीज उत्कृष्टता केंद्र क्षेत्र के किसानों के लिए फूलों की नई नई किस्में ईजाद कर रहा है।
जीवन बदलने की संस्था बनें गुरूग्राम में एग्री बिजनेस स्कूल, मुनिमपुर फूल एवं बीज उत्कृष्टता केंद्र, रईया में उद्यान अनुसंधान केंद्र जैसे संस्थान हमारे किसानों का जीवन बदलने के संस्थान साबित होंगे। उन्होंने कहा कि हमने नहर टूटने पर,ड्रेन ओवर फलो होने पर मुआवजा देना शुरू किया। जोखिम फ्री खेती के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, बागवानी भावांतर भरपाई योजना सहित जैसे किसान हितैषी कार्य किए गए। हमारे विरोधी भी इस बात को स्वीकार करते हैं कि इन योजनाओं के लागू होने से किसानों का जीवन सरल हुआ है। धनखड़ ने आह्वान किया कि किसान इस केंद्र का ज्यादा से ज्यादा लाभ उठाएं।
महाराणा प्रताप उद्यान विश्वविद्यालय करनाल के वीसी प्रो सुरेश मल्होत्रा ने कहा कि रईया केंद्र अखिल भारतीय बागवानी अनुसंधान केंद्र से जुडक़र देश के मैप पर आ गया है , जल्द ही यह केंद्र अनुसंधान कें क्षेत्र में विश्व के मैप पर अपनी पहचान स्थापित करेगा। यह सब पूर्व कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री और आज के हमारे मुख्य अतिथि औमप्रकाश धनखड़ जी के प्रयासों से पूरा हुआ है। उनका प्रयास है यह उत्कृष्टï अनुसंधान केंद्र बनकर उभरे। मूल्यवान फसलों की नई नई किस्म तैयार की जा सके।