चंडीगढ़, 18 मार्च। आचार्य देवव्रत, गुजरात के राज्यपाल, ने हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र के दौरान प्राकृतिक खेती पर विशेष व्याख्यान देते हुए इसे मानव स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और भविष्य की पीढ़ियों से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा प्राकृतिक कृषि मिशन को बढ़ावा देने के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इससे प्रदेश के लोगों के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने जानकारी दी कि गुजरात में करीब 8 लाख किसान प्राकृतिक खेती अपना चुके हैं और इस दिशा में सभी दलों का सहयोग मिल रहा है।
किसानों की आय, स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए प्राकृतिक खेती जरूरी
अपने अनुभव साझा करते हुए आचार्य देवव्रत ने बताया कि गुरुकुल कुरुक्षेत्र में कार्यरत रहते हुए एक घटना ने उन्हें रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों पर विचार करने के लिए प्रेरित किया। कीटनाशकों के संपर्क में आने से एक कर्मचारी के बेहोश होने की घटना ने उन्हें प्राकृतिक खेती की ओर अग्रसर किया। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता लगातार घट रही है और भूमि का ऑर्गेनिक कार्बन स्तर चिंताजनक रूप से कम हो गया है। यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो भविष्य में शुद्ध भोजन और स्वच्छ जल की उपलब्धता संकट में पड़ सकती है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि रासायनिक खेती के कारण कैंसर, हृदय रोग और किडनी संबंधी बीमारियों में वृद्धि हो रही है। प्राकृतिक खेती को समाधान बताते हुए उन्होंने कहा कि यह कम लागत वाली, देशी गाय आधारित और पर्यावरण के अनुकूल पद्धति है। इसमें गोबर, गोमूत्र, गुड़ और बेसन जैसे साधारण तत्वों से सूक्ष्म जीवाणुओं की वृद्धि कर मिट्टी की उर्वरता बढ़ाई जाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पद्धति न केवल उत्पादन बढ़ाने में सक्षम है, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने में भी सहायक है।