चंडीगढ़, 12 मार्च। सिरसा की सांसद, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव और पूर्व मंत्री कुमारी सैलजा ने हरियाणा में छात्रों के बढ़ते ड्रॉपआउट और शिक्षा व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि राज्य में बड़ी संख्या में छात्र पढ़ाई बीच में ही छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं, जो शिक्षा प्रणाली के लिए एक चिंताजनक संकेत है।
-एक वर्ष के भीतर लगभग 5.5 लाख छात्रों ने स्कूल छोड़ दिया -सरकार की पहली जिम्मेदारी सरकारी स्कूलों को मजबूत बनाना और उनमें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना है
हरियाणा शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी आंकड़ों का हवाला देते हुए कुमारी सैलजा ने बताया कि राज्य में एक वर्ष के भीतर लगभग 5.5 लाख छात्रों ने स्कूल छोड़ दिया। इनमें से करीब 2.58 लाख छात्र सरकारी स्कूलों से और लगभग 2.91 लाख छात्र निजी स्कूलों से पढ़ाई छोड़ चुके हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल आंकड़ों का विषय नहीं है, बल्कि लाखों बच्चों के भविष्य से जुड़ा गंभीर मामला है, विशेषकर गरीब और ग्रामीण परिवारों की बेटियों के लिए। कुमारी सैलजा ने कहा कि छात्रों के ड्रॉपआउट की बढ़ती संख्या के पीछे कई गंभीर कारण हैं। इनमें ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च और वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों की कमी, स्कूलों की लंबी दूरी, आर्थिक कठिनाइयाँ, रोजगार की तलाश में परिवारों का पलायन और अभिभावकों में शिक्षा के प्रति जागरूकता की कमी प्रमुख हैं। उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों की लड़कियाँ सबसे अधिक प्रभावित हो रही हैं, क्योंकि दूर स्थित स्कूल, परिवहन सुविधाओं की कमी और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण कई परिवार अपनी बेटियों की पढ़ाई जारी नहीं रख पाते। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार की चिराग योजना भी इस बात का संकेत है कि सरकारी स्कूलों की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर है, क्योंकि इसके माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ने की सुविधा दी जा रही है।