निखिल सहराय
गुरुग्राम। जिस घर में बहुओं का सम्मान होता है, वहां हर रोज, 365 दिन दिवाली होती है। उस घर पर किसी तरह का दोष नहीं लगता। बहु के रूप में आई दूसरों की बेटी को पलकों पर रखने वाले घर सदा समृद्ध रहते हैं। सास-ससुर को माता-पिता के रूप में स्वीकारने वाली बहुएं सदा खुश रहती हैं। यह बात गौतीर्थ तुलसी तपोवन गौशाला वृंदावन के संचालक एवं विश्व प्रसिद्ध कथावाचक पुराण मनीषी परम पूज्य श्री कौशिक जी महाराज ने अपने प्रवचनों में कही।
वे शनिवार को ओल्ड जेल कॉम्पलेक्स में श्री शिवमहापुराण कथा एवं गोमहोत्सव में प्रवचन कर रहे थे। प्रवक्ता अनिल शास्त्री ने 11 दिवसीय कथा के 10वें दिन पूज्य गुरुजी ने शनिवार को अपने प्रवचनों में परिवार में बड़े-बुजुर्गों के सम्मान, देवी-देवताओं का पूजन करने सहित कई विषयों पर ज्ञानवर्धन किया। शनिवार की कथा में कथा श्रवण करने भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष जीएल शर्मा, आदर्श ब्राह्मण सभा के पदाधिकारी भी पहुंचे।
-दूसरे की बेटी को पलकों पर रखोगे तो घर सदा समृद्ध रहेगा
-सास-ससुर को माता-पिता के रूप में स्वीकारने वाली बहुएं सदा खुश रहती हैं
-गुरुग्राम के ओल्ड ज्यूडिशियल कॉम्पलेक्स में श्रीशिव महापुराण कथा का दसवां दिन
कौशिक जी महाराज ने कहा कि बहुओं के लिए सास-ससुर की सेवा करने से बड़ा कोई धर्म नहीं है। चाहे सास हो या सास की सास, बहुओं को सेवा में कमी नहीं रहने देनी चाहिए। एक बार भगवान को भोग ना लगाना, मगर घर का बुजुर्ग भूखा नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर बहुओं के होते हुए बूढ़े सास-ससुर को कपड़े धोने पड़ें तो बहुओं को दोष लग जाएंगें। उन्होंने यह भी कहा कि जिसने कभी अपने पति से झगड़ा नहीं किया। जिसने अपने सास-ससुर की सेवा की है, उसकी दहलीज पर रोज मां गंगा दर्शन करने आती हैं। लक्ष्मी नारायण उस घर को छोडक़र नहीं जाते। पूज्य गुरुजी ने कहा कि श्रीकृष्ण जी को गाय बहुत ही प्रिय हैं। जो गायों की रक्षा करता है श्री कृष्ण जी उनकी रक्षा करते हैं। जो गायों के लिए अपना सुख छोड़ देते हैं, श्री कृष्ण जी उसका सुख बन जाते हैं।
अच्छे-बुरे लोगों के बीच के भेद को बताते हुए गुरुजी ने कहा कि जो सबके लिए शुभ करता है उसका कोई अशुभ नहीं कर सकता। जो अशुभ करता है उसका कोई शुभ नहीं कर सकता। उन्होंने साल में एक बार अपने घर में विद्वान बुलाकर अनुष्ठान कराने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज हमारे देश से कर्मकांड करने वाले पंडित लुप्त होते जा रहे हैं। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि इनकी हमें कल भी जरूरत थी, आज भी है और कल भी रहेगी। उन्होंने कहा कि किसी भी मंदिर में पुजारी को सिर्फ पूजा तक ही सीमित रखा जाना चाहिए। बिना पुजारी, पंडित के मंदिर सूना रहता है। जब रामजी के विवाह में, कन्हैया जी के विवाह में ब्राह्मण की जरूरत पड़ी तो आपके बच्चों के विवाह में भी जरूरत होगी। अपनी भारतीय परंपराओं को ना भूलें। संस्कृति इनके द्वारा ही रहेगी। चार चीजें सृष्टि के आरंभ में पैदा हुईं-ये यज्ञ, वेद, गाय और ब्राह्मण हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि ब्राह्मण के बिना वेद नहीं। वेद के बिना मति नहीं। गोमाता के बिना गति नहीं। साथ ही उन्होंने अपनी रसोई की देसी चीजों से उपचार की विधि की जानकारी भी दी।
श्री कौशिक जी महाराज ने यह भी कहा कि भारत के किसी भी कोने में ग्रहण की छाया भी पड़ जाती है तो सूतक लग जाता है। किसी से मदद लेने की सलाह देते हुए गुरुजी ने कहा कि बिना उसके बारे में जाने कभी मदद ना लें। उन्होंने कहा कि जहां नारी का धर्म मजबूत होता है, उस परिवार का कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। साथ ही कहा कि एकादशी का व्रत, तुलसी की पूजा, गइया को रोटी और गंगा का आचमन सबके घर में होना चाहिए। उस घर में समस्याएं नहीं आती। साधुओं के हाथ से मिली तुलसी कंठ में पहनें, सूतक, पातक में उतारने की भी जरूरत नहीं है। संतान को जन्म देने के समय में भी उतारने की जरूरत नहीं है। खान-पान गलत है, उन्हें तुलसी, रुद्राक्ष पहनने का हक नहीं है।
तुलसी परम वैष्णवों की पहचान है। उन्होंने कहा कि नर्मदा जल रखने से अकाल मृत्यु नहीं होती। गंगा नहाने से जो फल मिलता है, नर्मदा के दर्शन से उतने फल की प्राप्ति होती है। सनातन संस्कृति में गंगा जल हो, तुलसी मइया हो, गाय की रोटी दी जाती हो। उन्होंने यह भी कहा कि जीवन में एक बार ब्रज चौरासी की यात्रा को भी जरूर करें। ब्रज में चारों धाम केदारनाथ, बद्रीनाथ, भुजेश्वर भगवान, नंदकेश्वर महादेव हैं। दूसरे धर्म के लोग भी शंकर की पूजा करते हैं तो महादेव उनका भी कलयाण कर देते हैं। ईश्वर के दरबार में कोई जाति-पाति नहीं। 12 जयोतिर्लिंग सोमनाथ, मल्लिकाकार्जुन, महाकाललेश्वर, केदानाथ, ओंकारेश्वर, भीमाशंकर, विश्वनाथ, त्रयंबकेश्वर, वैधनाथ, नागेश्वर, रामेश्वर, भीष्मेश्वर की कथा का भी पूज्य गुरु जी ने रसपान कराया।