चंडीगढ़, 13 फरवरी। हरियाणा पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता 2023 , भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 तथा भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ-साथ न्यायिक प्रक्रिया में आधुनिक तकनीक के सफल उपयोग के जरिए देशभर के लिए एक अनुकरणीय मॉडल प्रस्तुत किया है। 1 जुलाई 2024 से लागू इन नए आपराधिक कानूनों को धरातल पर उतारने के लिए हरियाणा पुलिस ने मिशन मोड में कार्य करते हुए व्यापक प्रशिक्षण, डिजिटलीकरण, फॉरेंसिक सुदृढ़ीकरण और तकनीक आधारित न्याय प्रणाली को सशक्त बनाया है। हरियाणा ने तीनों नए आपराधिक कानूनों का सफलतापूर्वक क्रियान्वयन किया है और भारत सरकार के आंकलन के अनुसार इनके क्रियान्वयन में देश में दूसरा स्थान प्राप्त किया है।
सोच से सिस्टम तक बदलाव की अगुवाई
हरियाणा के पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने कहा कि नए आपराधिक कानून केवल कानूनी सुधार नहीं, बल्कि न्याय प्रणाली को अधिक पारदर्शी, समयबद्ध और जन-केंद्रित बनाने का सशक्त माध्यम हैं। टेक्नोलॉजी और प्रशिक्षण को पुलिसिंग का अभिन्न अंग बनाकर हरियाणा पुलिस ने यह सुनिश्चित किया है कि प्रत्येक पुलिसकर्मी संवेदनशीलता, दक्षता और उत्तरदायित्व के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करे। यह परिवर्तन केवल प्रक्रियाओं में नहीं, बल्कि सोच और कार्यसंस्कृति में भीआया है। व्यापक प्रशिक्षण से पुलिसिंग में गुणात्मक बदलाव
नए कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए हरियाणा पुलिस के शत-प्रतिशत कर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया है। इसके साथ ही 38 हजार 795 पुलिसकर्मियों को आईगोट कर्मयोगी पोर्टल पर ऑनबोर्ड किया गया है। इस प्रशिक्षण का सीधा असर जांच की गुणवत्ता, निर्णय प्रक्रिया की गति और पीड़ितों के प्रति संवेदनशील व्यवहार में स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो रहा है। जांच अधिकारियों के मार्गदर्शन हेतु नए कानूनों के विशिष्ट प्रावधानों पर 14 द्विभाषीय दिशा-निर्देश भी जारी किए गए हैं।
डिजिटल प्रक्रियाओं से पारदर्शिता और दक्षता
ईसाक्ष्य और ई-सम्मन जैसे डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म्स के माध्यम से 100 प्रतिशत तलाशी और जब्ती की रिकॉर्डिंग डिजिटल रूप से की जा रही है, 68.77 प्रतिशत समन इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से प्राप्त किए जा रहे हैं जिससे कागज, ईंधन एवं आवागमन व्यय में उल्लेखनीय कमी आई है। इसके साथ ही, पिछले लगभग एक साल में 62214 पुलिसकर्मी न्यायालयों में वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित हुए। वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से 84.49 प्रतिशत अभियुक्तों को जेल से अदालतों में पेश किया जा रहा है। 15 जनवरी 2025 से 31 जनवरी 2026 के दौरान 89,136 गवाहों के बयान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संपन्न कराए गए। डॉक्टरों, फॉरेंसिक एवं अन्य विशेषज्ञों, पुलिस एवं जेल अधिकारियों तथा सामान्य गवाहों की उपस्थिति अब भौगोलिक दूरी, सुरक्षा व्यवस्था या समय की कमी से बाधित नहीं रही।
फॉरेंसिक और साइबर क्षमताओं का विस्तार
राज्य के प्रत्येक जिले में मोबाइल फोरेंसिक वैन की तैनाती हेतु 257 नए पदों की भर्ती प्रक्रिया प्रगति पर है। इसी कड़ी में कार्यरत कर्मियों की संख्या को बढ़ाकर 345 कर दिया गया है। एफएसएल/आरएफएसएल में स्वीकृत पदो की संख्या 351 से बढ़ाकर 599 कर दिया गया है। प्रत्येक जिले में एक मोबाइल फोरेंसिक वैन तथा बड़े जिलों में 2 वैन संचालित किए जा रहे है।
डिजिटल न्याय प्रणाली से सुशासन, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक बचत की ऐतिहासिक उपलब्धि
तीन नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन से प्राप्त प्रशासनिक, पर्यावरणीय और आर्थिक लाभों का आकलन करने के लिए एक स्वतंत्र एजेंसी द्वारा विस्तृत अध्ययन कराया गया, जिसके अत्यंत सकारात्मक परिणाम सामने आए। ई-चालान प्रणाली की शुरुआत से मात्र चार महीनों में लगभग 6,704 , रिम काग़ज़ की बचत हुई, जिससे 8,165 किलोग्राम CO₂ उत्सर्जन में कमी और 3,15,106 लीटर पानी का संरक्षण संभव हुआ। इसी प्रकार, ई-समन प्रणाली के उपयोग से लगभग 3,240 रिम काग़ज़ बचाए गए, जिसके परिणामस्वरूप 1,52,306 लीटर पानी तथा 27,00,466 लीटर ईंधन की बचत हुई, जिसकी अनुमानित मौद्रिक कीमत ₹25.65 करोड़ है, यह उपलब्धि केवल छह महीनों की अवधि में हासिल की गई। वहीं, न्यायिक प्रक्रिया में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के व्यापक उपयोग से सात महीनों में लगभग 1,22,400 लीटर ईंधन की बचत हुई, जिसकी अनुमानित लागत ₹1.16 करोड़ है। इसके अतिरिक्त, पुलिस कर्मियों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेशी सुनिश्चित किए जाने से यात्रा भत्ते के रूप में लगभग ₹1.10 करोड़ की अतिरिक्त बचत दर्ज की गई। ये आंकड़े न केवल प्रशासनिक दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाते हैं, बल्कि सतत विकास, पर्यावरण संरक्षण और जनधन के विवेकपूर्ण उपयोग की दिशा में एक सशक्त उदाहरण भी प्रस्तुत करते हैं।