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चंडीगढ़। हरियाणा के जींद जिला निवासी सुनील जागलान ने अपने कार्यों से न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बनाई है। वह एक सरपंच ,सामाजिक कार्यकर्ता,यूनिसेफ के सलाहकार के साथ अब महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ऑफ़ प्रैक्टिस हैं। इससे पहले वह गुरुग्राम विश्वविद्यालय में सलाहकार,एसजीटी विश्वविद्यालय में प्रोफेसर भी रहे हैं। वह सामाजिक सरोकार के विषयों को आधुनिक राष्ट्रीय शिक्षा नीति में समायोजित करने के लिए लगातार कार्य कर रहे हैं ताकि विकसित भारत की कल्पना को पूरा किया जा सके।
करीबन पंद्रह अलग-अलग विश्वविद्यालयों के प्रोफेसर उनके गांव में मिलने आ चुके हैं और उनके द्वारा किए गए सामाजिक प्रयोगों को बहुत महत्वपूर्ण मानते हुए उन्हें अनेकों राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुस्तकों में शामिल किया गया है।
अंतरराष्ट्रीय शिक्षक दिवस विशेष, देश के पहले सरपंच जो बने प्रोफेसर
अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर मिली सामाजिक शिक्षक के तौर मान्यता
सीबीएसई बोर्ड में उनके ग्राम पंचायत की कहानी को पाठ योजना के रूप में पढ़ाया जाता है, जिसमें गांव में लैंगिक समानता लाने के लिए अनेकों क्रांतिकारी प्रयोग करके बड़े बदलाव किए गए। द न्यूयॉर्क टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित अखबार ने दो बार उन्हें पहले पेज पर प्रोफाइल किया है, जिसमें उनके संघर्ष और सामाजिक प्रयोगों को दिखाया गया और यह कहानी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत ज्यादा पसंद की गई। इसके अलावा, द वैनिटी फेयर, कॉस्मोपॉलिटन, डीडब्ल्यू, बीबीसी और एनएचके जैसे अनेकों अंतरराष्ट्रीय प्लेटफार्मों ने उनके कार्यों को उजागर किया है।
सुनील जागलान ने अपने कार्यों से न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बनाई है।
सुनील जागलान के कार्यों ने न केवल देश में बल्कि विश्व भर में अपनी छाप छोड़ी है। वह देश के अनेकों केंद्रीय विश्वविद्यालयों, राज्य विश्वविद्यालयों और प्राइवेट विश्वविद्यालयों में अपने सामाजिक प्रयोगों के माध्यम से अर्जित ज्ञान को साझा कर रहे हैं। सुनील जागलान ने अपने गांव में अनेकों विश्वविद्यालयों, अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्कूलों को आने के लिए मजबूर किया है।
आज सुनील जागलान के कार्यों का लोहा देश के गाँव, विश्वविद्यालय और अंतरराष्ट्रीय संस्थान भी मानते हैं। इससे विश्व में वैश्विक कुटुंबकम की भावना को बढ़ावा मिलेगा और एक बेहतर समाज का निर्माण होगा। सुनील जागलान के बारे में सैकड़ों किताबों में लेख प्रकाशित हो चुके हैं और देश दुनिया की लगभग हर भाषा में उनके बारे में लेख प्रकाशित हुए हैं।