चंडीगढ़। हरियाणा में धान की कटाई के साथ ही पराली जलाने की घटनाएं भी शुरू हो गई हैं। ऐसे में वायु गुणवत्ता और खराब होने की आशंका को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने हरियाणा समेत उत्तर भारतीय राज्यों में उपायुक्तों एवं जिला मजिस्ट्रेटों को और अधिक अधिकार प्रदान किए हैं। उन्हें इस समस्या पर अंकुश लगाने में विफल रहने वाले सरकारी अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने का अधिकार दिया गया है।
पराली जलाने से रोकने में कोताही पर अधिकारियों पर कार्रवाई कर सकेंगे डीसी
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने जारी किए निर्देश
हरियाणा समेत उत्तर भारत में पराली जलाने की समस्या लगातार गंभीर हो रही है। हरियाणा सरकार ने पराली जलाने वालों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए अब तक 22 किसानों के रिकॉर्ड में रेड एंट्री कर दी है। इसका सीधा असर इन किसानों पर पड़ रहा है, क्योंकि वे आगामी 2 सीजन तक अनाज मंडियों में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अपनी फसल की बिक्री नहीं कर सकेंगे। इसके अलावा जुर्माना और एफआईआर की कार्रवाई भी की जाएगी। साथ ही उन अधिकारियों से भी जवाब तलब होगा, जिनकी लापरवाही से पराली जलाने की घटनाएं हुईं।
जिन किसानों पर कार्रवाई की गई है उनमें चरखी दादरी के 15, जींद के 4, करनाल के 2 और फतेहाबाद का 1 किसान शामिल है।
इससे पहले जिला प्रमुखों को लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष शिकायत दर्ज कराने की अनुमति थी। सीएक्यूएम के 10 अक्टूबर 2024 के संशोधित आदेश के तहत अब हरियाणा के अलावा पराली जलाने की समस्या वाले राज्यों में उपायुक्तों, जिला कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट को अपने अधिकार क्षेत्र में पराली जलाने पर प्रतिबंध लागू करने के लिए जिम्मेदार नोडल अधिकारियों, विभिन्न स्तरों पर पर्यवेक्षीय अधिकारियों और थाना प्रभारियों सहित अधिकारियों द्वारा निष्क्रियता की स्थिति में क्षेत्राधिकार वाले न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष शिकायत दर्ज कराने का अधिकार देता है।