चंडीगढ़। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) पंचकूला मुख्यालय की लापरवाही और मनमानी का खामियाजा हिसार जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों को भुगतना पड़ रहा है। ढाई साल से उनका परफार्मेंस बेस्ड इंसेंटिव (पीबीआई) जारी नहीं हुआ है। कई बार सिविल सर्जन और एनएचएम अधिकारियों को अवगत कराने के बावजूद समस्या जस की तस बनी रही।
एनएचएम मुख्यालय की मनमानी से हिसार के सीएचओ परेशान
ढाई साल से परफार्मेंस बेस्ड इंसेंटिव अटका, मुख्यमंत्री दरबार में लगाई गुहार
मजबूर होकर सीएचओ प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री नायब सैनी के समक्ष यह मुद्दा उठाया। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि जल्द ही इंसेंटिव जारी किया जाएगा। हिसार जिले के डॉ.सुनील (उपकेंद्र सुंदावास, सीएचसी आर्यनगर), डॉ़ रजत कुमार (न्योली खुर्द, सीएचसी सीसवाल), डॉ़ रमनकांत शर्मा (मालापुर, सीएचसी सीसवाल), डॉ़ सुनील ईशरवाल (मोटरश्याम, सीएचसी सीसवाल) और डॉ़ नीलम (सलेमगढ़, सीएचसी सीसवाल) ने मुख्यमंत्री को बताया कि जनवरी 2023 से अब तक उनका पीबीआई पेंडिंग है।
बरवाला ब्लॉक के बहबलपुर और किरोड़ी गांव के सीएचओ को यह इंसेंटिव मिल चुका है। अन्य जिलों जैसे पानीपत, करनाल और चरखी-दादरी में भी ब्रिज कोर्स के बाद समय पर भुगतान हो गया है। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि बीएएमएस और बीएससी नर्सिंग पास सीएचओ को पहले ब्रिज कोर्स कराना अनिवार्य था। दिसंबर 2022 में ब्रिज कोर्स और ट्रेनिंग पूरी करने के बाद वे पूर्ण रूप से योग्य हो गए।
16 दिसंबर, 2022 से सीएचओ के पद पर कार्यरत रहते हुए उन्हें पीबीआई मिलना चाहिए था। लेकिन विभाग की लापरवाही के कारण अब तक भुगतान अटका हुआ है। सीएचओ का कहना है कि उन्होंने जुलाई 2022 में बीपीसीसीएचएन कोर्स पूरा कर लिया था। परिणाम 10 अक्तूबर 2023 को घोषित हुआ, मगर योग्यता ट्रेनिंग पूरी होने के साथ ही मान्य हो जाती है। ऐसे में दिसंबर 2022 से पीबीआई जारी होना चाहिए था। अन्य जिलों में परीक्षा के बाद यह लाभ दिया गया है, मगर हिसार के सीएचओ अब भी वंचित हैं।
उन्होंने कहा कि यह सीधा अन्याय और सौतेला व्यवहार है। मुख्यमंत्री नायब सैनी ने प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिलाया कि उनकी समस्या का समाधान जल्द किया जाएगा और लंबित पीबीआई जारी कराया जाएगा। सीएचओ ने उम्मीद जताई है कि मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप से उन्हें जल्द ही उनका हक मिलेगा। कर्मचारियों का कहना है कि यह मुद्दा न केवल वित्तीय अधिकारों से जुड़ा है बल्कि सीएचओ की मनोबल और कार्यक्षमता पर भी असर डाल रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी मजबूती के लिए आवश्यक है कि इन अधिकारियों को समय पर उनका हक मिले।