चंडीगढ़, हरियाणा में शैक्षणिक सत्र 2025-26 का आधा समय बीतने के बावजूद अध्यापकों की ट्रांसफर ड्राइव शुरू नहीं हो सकी है। राज्य सरकार के दावों के बावजूद अभी तक तबादलों का शेड्यूल भी जारी नहीं हुआ है। विभाग ने नई संशोधित नीति तैयार कर ली, एमआईएस पोर्टल पर डाटा सत्यापन और रेशनलाइजेशन की प्रक्रियाएं पूरी हो गईं, लेकिन ट्रांसफर ड्राइव फाइलों में ही अटका हुआ है। इससे शिक्षकों में गहरा रोष है और वे सरकार व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहे हैं। शिक्षक तबादला करवाओ संघर्ष समिति पहले ही शिक्षा मंत्री के आवास पर सांकेतिक भूख हड़ताल कर चुकी है। समिति का कहना है कि बार-बार वादों और बैठकों के बावजूद कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आ रहा। राज्य प्रधान कृष्ण कुमार निर्माण, राज्य महिला प्रधान जसबीर कौर और राज्य प्रेस सचिव ऋषिराज नरवाल का कहना है कि विभाग की यह देरी सरकार की ड्रीम पॉलिसी पर ही सवाल खड़ा कर रही है।
समिति पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि विभाग ने कई दौर की बैठकों के बाद भी हल नहीं निकाला है। रेशनलाइजेशन, एमआईएस अपडेट, फोन नंबर तक अपडेट करवान तथा मॉडल/पीएमश्री के लिए परीक्षा आयोजित करवाने के बाद भी अब तक ट्रांसफर ड्राइव शुरू नहीं की गई। उनका कहना है कि इससे न केवल शिक्षकों का विश्वास टूटा है, बल्कि शिक्षा विभाग की साख भी धूमिल हो रही है।
हरियाणा में आधा बीता शैक्षणिक सत्र, नहीं शुरू हुए तबादले
फाइलों में अटका ट्रांसफर ड्राइव, शिक्षकों में बढ़ा रोष
समिति ने कहा कि हजारों शिक्षक, जो वर्षों से ट्रांसफर की प्रतीक्षा कर रहे हैं, उनका सपना टूटने की कगार पर है। विशेषकर दूर-दराज के अस्थायी स्टेशनों पर तैनात और वर्षों से एनिवेहर की सजा भुगत रहे शिक्षक सबसे ज्यादा परेशान हैं। इन हालातों में छात्र-शिक्षक अनुपात भी बिगड़ता जा रहा है।
राज्य प्रधान कृष्ण कुमार निर्माण ने दावा किया कि स्वयं मुख्यमंत्री समिति के साथ ट्रांसफर करने का वादा कर चुके हैं। शिक्षा मंत्री भी कई बार सार्वजनिक मंचों से ट्रांसफर ड्राइव शुरू करने की घोषणा कर चुके हैं। विभागीय स्तर पर सारी प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं। इसके बावजूद फाइलें दबने से शिक्षकों का धैर्य टूट रहा है। समिति ने साफ चेतावनी दी है कि यदि तुरंत ट्रांसफर ड्राइव का शेड्यूल जारी नहीं किया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। शिक्षकों का कहना है कि सरकार को अपने ही वादों को निभाते हुए अविलंब ट्रांसफर ड्राइव शुरू करनी चाहिए, ताकि वर्षों से इंतजार कर रहे शिक्षकों को राहत मिल सके और शिक्षा व्यवस्था भी दुरुस्त हो सके।