चंडीगढ़, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस, 2025 को लाल किले की प्राचीर से घोषित जी.एस.टी. सुधारों को मात्र एक महीने के भीतर लागू कर दिया गया है। यह मोदी की गारंटी का प्रमाण है, जो सदैव पूरी होती है। जी.एस.टी. में किए गए ये सुधार आत्मनिर्भर भारत की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे। प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए स्वदेशी, मेक इन इंडिया आह्वान को साकार करने में भी ये सुधार महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। नायब सिंह सैनी ने कहा कि जीएसटी ने कर प्रणाली को सरल और पारदर्शी बनाया है। इसने राज्यों के बीच व्यापार में आने वाली बाधाओं को भी दूर किया है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'एक राष्ट्र-एक कर-एक बाजार' की परिकल्पना को साकार किया है।
उन्होंने कहा कि जीएसटी परिषद् की 56वीं बैठक में नागरिकों पर बोझ कम करने और अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इन निर्णयों को स्वागत योग्य कदम बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जीएसटी करों को तर्कसंगत बनाने से रोजमर्रा इस्तेमाल के उपभोक्ता सामान सस्ते होंगे। इसलिए मध्यम वर्ग की बचत बढ़ेगी और आगामी त्योहारों के सीजन में खरीददारी से बाजार को बड़ा लाभ होगा।
उन्होंने कहा कि अब देश में जी.एस.टी. की सिर्फ दो ही मानक दरें रहेंगी। एक 5 प्रतिशत और दूसरी 18 प्रतिशत। इसके अलावा अहितकारी वस्तुओं के लिए विशेष दर 40 प्रतिशत सहित अन्य विशेष दरें रखी गई है। दो दरों 12 प्रतिशत व 28 प्रतिशत को समाप्त कर दिया गया है। दरों के वर्गीकरण में भी सुधार किया गया है। इससे वर्गीकरण संबंधी विवाद कम होंगे और मुकदमेबाजी से बचकर करदाताओं को लाभ होगा। नागरिकों द्वारा सामान्य रूप से उपयोग की जाने वाली वस्तुओं पर जीएसटी दरों को कम कर दिया गया है और कुछ पर समाप्त कर दिया गया है। इसके अलावा, लोगों पर टैक्स का बोझ और कम करने के लिए सेस को भी खत्म कर दिया गया है। कपड़ा और उर्वरकों पर इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर को हटाया गया है। इससे डीलरों के लिए पूंजी का अवरोध कम होगा।
उन्होंने कहा कि पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। इससे कम जोखिम वाले आवेदकों के लिए 3 दिनों के भीतर स्वचालित पंजीकरण हो सकेगा। सिस्टम विश्लेषण के आधार पर और एक निश्चित समय-सीमा के भीतर प्रोविजनल रिफंड जारी करना शामिल है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जी.एस.टी. परिषद् द्वारा किए गए सुधारों में कृषि और किसानों दोनों के हितों का ध्यान रखा गया है। हरियाणा एक कृषि प्रधान राज्य है, और हरियाणा के अनुरोध पर विचार करते हुए जीएसटी परिषद् ने फसल अवशेष प्रबंधन में उपयोग होने वाले कृषि उपकरणों पर जी.एस.टी. दरों में कमी की है। इसके लिए उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि परिषद् ने पैकेज्ड दूध और पनीर पर जी.एस.टी. जीरो कर दिया है. जबकि घी, मक्खन और सूखे मेवों पर दरें 12 से घटाकर 5 प्रतिशत कर दी गई हैं। इन बदलावों से कीमतें कम होंगी, महंगाई को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी और सभी को पौष्टिक भोजन प्राप्त होगा। साथ ही, रोटी और परांठा जैसे रोजमर्रा के खाद्य पदार्थों पर जी.एस.टी. पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है। इससे पारंपरिक खाद्य व्यवसायों को बढ़ावा मिलेगा। इन कदमों से हरियाणा के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा, किसानों को अपनी फसलों का मूल्यवर्धन करने में मदद मिलेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा होंगे।