चंडीगढ़, 8 मई । हरियाणा में खरखौदा के गोदाम से गायब होने वाली करोड़ों रुपये की शराब की जांच के लिए गठित एसआइटी का जिम्मा सीनियर आइएएस अधिकारी डा. अशोक खेमका को सौंपने की सिफारिश की गई है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल को गृह मंत्री अनिल विज ने एसआइटी प्रमुख के तौर पर खेमका का नाम सुझाया है। हालांकि मुख्यमंत्री कार्यालय में खेमका के नाम पर सहमति बनने के आसार नहीं हैैं। गृह मंत्री द्वारा गठित एसआइटी में शामिल होने के लिए बुधवार तक आबकारी विभाग की ओर से कोई नाम गृह सचिव को नहीं भेजा गया था, लेकिन बृहस्पतिवार को जानकारी दी गई कि एसआइटी में अतिरिक्त आबकारी एवं कराधान आयुक्त विजय सिंह शामिल रहेंगे। पुलिस की ओर से हाल ही में प्रमोट हुए एडीजीपी सुभाष यादव को शामिल किया गया है। गृह मंत्री ने एसआइटी को लीड करने के लिए तीन सीनियर आइएएस अधिकारियों के नाम का पैनल मुख्यमंत्री के पास भेजा है। इस पैनल में सबसे ऊपर सीनियर आइएएस डा. अशोक खेमका का नाम है। दूसरे नंबर पर कृषि विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजीव कौशल का नाम रखा गया, जबकि तीसरे स्थान पर टीसी गुप्ता का नाम है। तीनों ही तुजुर्बेकार अधिकारी हैैं। संजीव कौशल सीएम के प्रधान सचिव भी रह चुके हैैं और अनुभवी अधिकारी हैैं। टीसी गुप्ता सीएम सेल में मानीटिरिंग का नाम देखते हैैं और बिजली विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव हैैं।
गृह मंत्री ने एसआइटी द्वारा की जाने वाली जांच का दायरा भी बढ़ा दिया है। खरखौदा के अलावा फतेहाबाद व समालखा समेत एक दर्जन स्थानों पर शराब ठेकेदारों ने पुलिस व आबकारी विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से करोड़ों रुपये की शराब को खुर्दबुर्द कर डाला है। इससे सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है। यह राशि 500 से 800 करोड़ रुपये हो सकती है। गृह मंत्री ने निर्देश दिए हैैं कि एसआइटी अब प्रदेश के किसी भी शराब गोदाम अथवा ठेके पर माल (शराब) के स्टाक की जांच कर सकती है। एक अप्रैल 2019 से 31 मार्च 2020 तक के शराब के स्टाक का मिलान किया जाएगा, जिसे लाकडाउन की अवधि के दौरान अवैध रूप से मोटे दामों पर बेचा गया है। खरखौदा में सबसे ज्यादा घोटाला हुआ है। यहां शराब के गोदाम में पुलिस द्वारा अवैध रूप से पकड़ी जाने वाली शराब तथा आबकारी विभाग की शराब संयुक्त रूप से रखी जाती थी, लेकिन साढ़े पांच हजार पेटियां लाकडाउन में गायब हो गई। यानी बेच दी गई।(MOREPIC1)